पंजाब के फाजिल्का के एक किसान ने 6 करोड़ रुपये के भारी कर्ज और फसल की बर्बादी के बाद भेड़ पालन और एग्रोफोरेस्ट्री के जरिए अपनी किस्मत बदली। आज उनका 'ARU शीप फार्म' क्षेत्र के सबसे बड़े फार्मों में से एक है।

  • 6 करोड़ रुपये के कर्ज से उबरकर सालाना 50-60 लाख रुपये की कमाई।
  • एग्रोफोरेस्ट्री और व्यावसायिक भेड़ पालन का सफल एकीकरण।
  • शिक्षित युवा पीढ़ी का खेती के प्रति जुनून और आधुनिक दृष्टिकोण।

पंजाब के फाजिल्का जिले के खीप्पनवाली गांव के रहने वाले हरबिंदर सिंह संधू की कहानी अटूट साहस और नवाचार की मिसाल है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना से बीएससी (कृषि) करने के बाद, संधू ने 1994 में औपचारिक रूप से खेती शुरू की। हालांकि, उनकी शुरुआत आसान नहीं थी। जलभराव के कारण उनके परिवार के किन्नू के बाग नष्ट हो गए, जिससे उनके जीवन में संघर्ष का दौर शुरू हुआ।

कर्ज का जाल तब और गहरा गया जब उन्होंने गन्ने की खेती शुरू की। उत्पादन तो अच्छा था, लेकिन चीनी मिलों से भुगतान में देरी ने उन्हें वित्तीय संकट में डाल दिया, जिससे उन पर 5-6 करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ गया। इसके बाद उन्होंने बीटी कपास की खेती की, लेकिन 2015 में सफेद मक्खी (whitefly) के हमले ने उनके सपनों को एक बार फिर तोड़ दिया। डेयरी फार्मिंग का प्रयास भी कोविड-19 महामारी की भेंट चढ़ गया।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that Sandhu's transition from traditional monoculture to a diversified model of agroforestry and livestock represents a critical shift needed in Indian agriculture. By diversifying income streams, farmers can mitigate the risks associated with climate change, pest attacks, and market volatility.

हार मानने के बजाय, संधू ने खुद से सवाल किया कि 'किस तरह की खेती जीवित रह सकती है'। 2018 में उन्होंने 5-6 एकड़ में एग्रोफोरेस्ट्री (कृषि-वानिकी) शुरू की, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाकर 30 एकड़ कर दिया। इसके साथ ही 2021 में उन्होंने व्यावसायिक भेड़ पालन में कदम रखा। मथुरा के केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (CIRG) से प्रशिक्षण और मार्गदर्शन लेने के बाद, उन्होंने मात्र 8 भेड़ों से शुरुआत की।

"शिक्षा आपको खेती से दूर नहीं ले जाती, बल्कि यह आपको इस व्यवसाय को बेहतर ढंग से समझने और आधुनिक बनाने में मदद करती है।"

आज उनका ARU शीप फार्म (जो उनके तीन बच्चों के नाम पर है) 1,000 जानवरों का घर है। इसमें पंजाब काजला, यमुनापारी और पटनवारी जैसी नस्लें शामिल हैं। संधू अब न केवल प्रजनन के लिए जानवर बेचते हैं, बल्कि मांस उत्पादन के लिए भी बड़े पैमाने पर काम कर रहे हैं। उनके कुछ नर भेड़ 1-1.5 क्विंटल वजन के होते हैं, जिनकी कीमत 1 लाख रुपये से अधिक होती है।

इस सफलता की सबसे खास बात यह है कि उनके बच्चे—एक वकील, एक डाइटिशियन और एक मेडिकल छात्र—अपनी पेशेवर पढ़ाई के साथ-साथ सुबह 5 बजे उठकर फार्म का प्रबंधन करते हैं। यह उन पंजाब के युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जो रोजगार के लिए विदेशों का रुख कर रहे हैं।

खेती का प्रकार चुनौती/परिणाम वर्तमान स्थिति (ARU फार्म)
किन्नू/गन्ना जलभराव और भुगतान में देरी एग्रोफोरेस्ट्री (30 एकड़)
बीटी कपास सफेद मक्खी का हमला विविध आय स्रोत
डेयरी फार्मिंग कोविड-19 और लागत वृद्धि 1,000 भेड़ों का सफल फार्म
क्या आप जानते हैं?: एक भेड़ 17 महीनों के चक्र में दो बार बच्चे देती है और अक्सर जुड़वा बच्चों को जन्म देती है, जिससे झुंड का आकार तेजी से बढ़ता है।

Frequently Asked Questions

1. ARU शीप फार्म की आय का मुख्य स्रोत क्या है?
फार्म की आय का मुख्य स्रोत प्रजनन के लिए उच्च गुणवत्ता वाले जानवरों की बिक्री और मांस उत्पादन के लिए मौसमी भेड़ों की बिक्री है।

2. एग्रोफोरेस्ट्री क्या है और यह कैसे मददगार है?
एग्रोफोरेस्ट्री में फसलों के साथ-साथ पेड़ लगाए जाते हैं, जो न केवल अतिरिक्त आय प्रदान करते हैं बल्कि पर्यावरण और पशुओं के लिए छाया और चारा भी सुनिश्चित करते हैं।