नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने स्पष्ट किया कि ऊर्जा संक्रमण न्यायसंगत और समावेशी होना चाहिए। घोषणापत्र में स्वीकार किया गया कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए जीवाश्म ईंधन अभी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

  • जीवाश्म ईंधन उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए ऊर्जा मिश्रण में महत्वपूर्ण बने रहेंगे।
  • ऊर्जा संक्रमण 'न्यायसंगत, क्रमबद्ध, न्यायसंगत और समावेशी' होना चाहिए।
  • महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और डिजिटल ऊर्जा प्रणालियों पर जोर।
  • तकनीकी तटस्थता और राष्ट्रीय परिस्थितियों के आधार पर ऊर्जा लक्ष्यों का निर्धारण।

भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान 11 सदस्य देशों ने एक साझा घोषणापत्र जारी किया है। इस दस्तावेज़ में इस बात पर विशेष बल दिया गया है कि दुनिया को जलवायु लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ना है, लेकिन यह प्रक्रिया अचानक नहीं बल्कि 'क्रमबद्ध और समावेशी' होनी चाहिए। ब्रिक्स देशों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) का उपयोग पूरी तरह बंद करना तत्काल संभव नहीं है और यह ऊर्जा सुरक्षा का एक मुख्य आधार बना रहेगा।

घोषणापत्र में 'तकनीकी तटस्थता' (Technological Neutrality) के सिद्धांत को अपनाया गया है। इसका अर्थ है कि ऊर्जा संक्रमण के लिए किसी एक तकनीक को थोपने के बजाय, प्रत्येक देश को अपनी राष्ट्रीय परिस्थितियों, जरूरतों और प्राथमिकताओं के आधार पर अपना रास्ता चुनने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। यह दृष्टिकोण विकसित देशों द्वारा लगाए गए कड़े जलवायु दबावों के खिलाफ ग्लोबल साउथ की सामूहिक आवाज को दर्शाता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह घोषणापत्र वैश्विक ऊर्जा राजनीति में एक बड़ा बदलाव है। यह संकेत देता है कि ब्रिक्स देश अब पश्चिमी देशों के 'नेट जीरो' टाइमलाइन को बिना किसी आर्थिक सुरक्षा जाल के स्वीकार नहीं करेंगे। ऊर्जा सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर, ब्रिक्स समूह ने यह सुनिश्चित किया है कि आर्थिक विकास की कीमत पर पर्यावरण लक्ष्यों को प्राथमिकता न दी जाए।

"ऊर्जा संक्रमण केवल कार्बन कम करने के बारे में नहीं है, बल्कि यह विकासशील देशों की संप्रभुता और उनकी आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने के बारे में है।"

ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए, सदस्य देशों ने नवीकरणीय ऊर्जा, जैव ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, हाइड्रोजन और निम्न-कार्बन प्रौद्योगिकियों के संतुलित मिश्रण का समर्थन किया है। विशेष रूप से हाइड्रोजन वैल्यू चेन पर एक संयुक्त रिपोर्ट और शून्य-उत्सर्जन हाइड्रोजन के लिए प्रमाणन ढांचे पर काम करने की बात कही गई है।

डिजिटलीकरण के मोर्चे पर, ब्रिक्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत डेटा एनालिटिक्स के उपयोग को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। इसके लिए एक 'ब्रिक्स डिजिटल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' की स्थापना का प्रस्ताव है, जो स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देगा।

महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) के मुद्दे पर, देशों ने एक ऐसी आपूर्ति श्रृंखला बनाने की आवश्यकता पर सहमति जताई जो विश्वसनीय, जिम्मेदार और न्यायसंगत हो। यह कदम विशेष रूप से उन संसाधन-समृद्ध देशों के लिए महत्वपूर्ण है जो चाहते हैं कि उनके खनिजों का उपयोग केवल निर्यात के लिए न हो, बल्कि उनके अपने देश में मूल्यवर्धन (Value Addition) और आर्थिक विविधीकरण भी हो।

क्षेत्र पारंपरिक दृष्टिकोण ब्रिक्स का नया दृष्टिकोण
ऊर्जा स्रोत त्वरित डीकार्बोनाइजेशन विविध मिश्रण (जीवाश्म + नवीकरणीय)
संक्रमण की गति कठोर समय सीमा क्रमबद्ध और समावेशी (Orderly & Inclusive)
तकनीक विशिष्ट समाधान तकनीकी तटस्थता (Tech Neutrality)
क्या आप जानते हैं?: ब्रिक्स समूह अब केवल 5 देशों का समूह नहीं रहा, बल्कि इसका विस्तार होकर 11 देशों का एक शक्तिशाली आर्थिक ब्लॉक बन गया है, जो ग्लोबल साउथ का प्रतिनिधित्व करता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: ब्रिक्स घोषणापत्र में जीवाश्म ईंधन के बारे में क्या कहा गया है?
उत्तर: घोषणापत्र में स्वीकार किया गया है कि उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में ऊर्जा सुरक्षा के लिए जीवाश्म ईंधन की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

प्रश्न 2: 'तकनीकी तटस्थता' का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि देश अपनी राष्ट्रीय जरूरतों के अनुसार किसी भी उपलब्ध ऊर्जा तकनीक (परमाणु, सौर, हाइड्रोजन आदि) का चुनाव करने के लिए स्वतंत्र हैं।