अमेरिकी अर्थशास्त्री जॉफ़री सैश ने कहा है कि आने वाले 25 वर्षों में भारत विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है, जिससे अमेरिका तीसरे स्थान पर गिर सकता है। इस भविष्यवाणी के पीछे भारत-चीन की बढ़ती सहयोग और एशिया की आर्थिक शक्ति का बदलाव प्रमुख कारण हैं।
- भारत 25 वर्षों में अमेरिका को पीछे छोड़ सकता है
- भारत-चीन का सहयोग प्रमुख ड्राइवर है
- वैश्विक आर्थिक केन्द्र एशिया में वापस लौट रहा है
कोलंबिया विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जॉफ़री सैश ने 13 सितंबर 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट में यह दावा किया कि भारत अगले 25 वर्षों में संयुक्त राज्य अमेरिका को पीछे छोड़कर दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। सैश का तर्क है कि एशिया की ओर वैश्विक आर्थिक केंद्र का स्थानांतरण और भारत का तेज़ी से बढ़ता हुआ GDP इस बदलाव को संभव बना रहा है।
सैश ने विशेष रूप से भारत और चीन के बीच गहरे आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को इस उछाल का मुख्य इंजन बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग से दोनों की अर्थव्यवस्थाएँ 25 वर्षों के भीतर दुनिया की दो सबसे बड़ी बन सकती हैं, जबकि अमेरिका तीसरे स्थान पर आ जाएगा।
क्यों यह महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, भारत का यह उछाल वैश्विक निवेश प्रवाह, व्यापार नीतियों और भू‑राजनीतिक गतिशीलता पर गहरा असर डाल सकता है। यदि भारत विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनता है, तो यह अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती देगा और वैश्विक वित्तीय प्रणाली को पुनः आकार देगा।
“भारत का विकास केवल आर्थिक आँकड़ों तक सीमित नहीं है; यह वैश्विक शक्ति संतुलन को भी बदल देगा।”
सैश ने यह भी उल्लेख किया कि भारत की वर्तमान वृद्धि दर, जो 7-8% के बीच है, चीन और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ मिलकर एशिया को विश्व की आर्थिक धुरी बना रही है। इसके अलावा, भारत का विशाल युवा जनसंख्या, बढ़ता हुआ डिजिटल अवसंरचना और बहु‑क्षेत्रीय निवेश अवसर इसे इस बदलाव का अग्रदूत बना रहे हैं।
| देश | वर्तमान GDP रैंक | अगले 25 वर्ष बाद अनुमानित रैंक |
|---|---|---|
| संयुक्त राज्य अमेरिका | 1 | 3 |
| भारत | 5 | 1 |
| चीन | 2 | 2 |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या भारत की आर्थिक वृद्धि केवल घरेलू कारकों पर निर्भर है?
उत्तर: नहीं, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, विदेशी निवेश और भारत-चीन सहयोग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रश्न 2: इस भविष्यवाणी का वैश्विक व्यापार पर क्या असर पड़ेगा?
उत्तर: यह अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व को कम कर सकता है और एशिया में व्यापारिक नेटवर्क को पुनः व्यवस्थित कर सकता है।