तमिलनाडु के पावरलूम बुनकरों ने राज्य सरकार की मुफ्त धोती और साड़ी वितरण योजना के तहत अपनी मजदूरी बढ़ाने की मांग की है। बुनकरों का कहना है कि कच्चे माल और बिजली की बढ़ती लागत के कारण मौजूदा दरें अपर्याप्त हैं।
- तमिलनाडु सरकार द्वारा 2.25 करोड़ परिवार कार्ड धारकों को पोंगल के लिए मुफ्त वस्त्र दिए जाएंगे।
- पावरलूम बुनकर प्रति पिक 18 पैसे की मांग कर रहे हैं, जबकि पिछले वर्ष यह दर 11-12.5 पैसे थी।
- हाथकरघा विभाग ने वेतन की समीक्षा के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है।
तमिलनाडु के कोइम्बतूर क्षेत्र के पावरलूम बुनकरों ने राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी मुफ्त धोती और साड़ी वितरण योजना के तहत अपनी मजदूरी में महत्वपूर्ण वृद्धि की मांग की है। फेडरेशन ऑफ तमिलनाडु वीवर्स एसोसिएशन के अनुसार, आगामी पोंगल उत्सव के दौरान राज्य के लगभग 2.25 करोड़ परिवार कार्ड धारकों को मुफ्त वस्त्र वितरित किए जाने की योजना है।
सरकार ने बुनकरों को कुल 1.7764 करोड़ ब्लीच किए हुए धोती और 1.7722 करोड़ साड़ियाँ तैयार करने का आदेश दिया है। बुनकरों का तर्क है कि चूंकि सरकार ने हाथकरघा (Handloom) बुनकरों के लिए मजदूरी में वृद्धि की घोषणा कर दी है, इसलिए पावरलूम बुनकरों के साथ भी न्याय किया जाना चाहिए। वर्तमान में, बुनकर प्रति पिक 18 पैसे की मांग कर रहे हैं, जबकि पिछले वर्ष उन्हें धोती के लिए 11 पैसे और साड़ी के लिए 12.5 पैसे का भुगतान किया गया था।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा केवल मजदूरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तमिलनाडु की कपड़ा अर्थव्यवस्था की स्थिरता से जुड़ा है। बढ़ती बिजली की लागत और कच्चे माल के दामों में उछाल ने बुनकरों के मुनाफे को लगभग समाप्त कर दिया है। यदि मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो उत्पादन की गुणवत्ता और आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।
बढ़ती लागत और गुणवत्ता मानकों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए बुनकरों के लिए उचित मजदूरी सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
इस वर्ष, सरकार ने वस्त्रों की गुणवत्ता और मजबूती बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है। उच्च गुणवत्ता वाले कपड़े बनाने के लिए अधिक बिजली और श्रम की आवश्यकता होती है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ जाती है। बुनकरों का कहना है कि बिना उचित मुआवजे के उच्च गुणवत्ता बनाए रखना उनके लिए आर्थिक रूप से असंभव होगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
तमिलनाडु सदियों से भारत के कपड़ा उत्पादन का केंद्र रहा है। कोइम्बतूर जैसे शहर 'दक्षिण भारत का मैनचेस्टर' कहलाते हैं। यहाँ की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पावरलूम और हैंडलूम उद्योग पर टिकी है। सरकारी योजनाएं इन बुनकरों के लिए आय का मुख्य स्रोत हैं, लेकिन अक्सर मजदूरी और उत्पादन लागत के बीच का अंतर विवाद का कारण बनता है।
| वस्तु (Item) | पिछला वेतन (प्रति पिक) | मांगी गई मजदूरी (प्रति पिक) |
|---|---|---|
| धोती (Dhoti) | 11 पैसे | 18 पैसे |
| साड़ी (Saree) | 12.5 पैसे | 18 पैसे |
Frequently Asked Questions
1. बुनकर किस दर पर वेतन की मांग कर रहे हैं?
बुनकर प्रति पिक 18 पैसे की मांग कर रहे हैं।
2. सरकार ने समीक्षा के लिए क्या कदम उठाए हैं?
हाथकरघा विभाग ने एक पांच सदस्यीय समिति बनाई है जो 18 सितंबर तक अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।