तिरुप्पुर के वस्त्र और कपड़ा मिलों ने यार्न की कीमत में लगातार वृद्धि को रोकने के लिए न्यूनतम फर्श मूल्य निर्धारित करने की माँग की है। उन्होंने सरकार से निर्यात प्रतिबंध, आयात शुल्क में छूट और सीसीआई से प्राथमिकता आधारित कपास आपूर्ति की भी अपील की।

  • तिरुप्पुर वस्त्र समूह ने यार्न के न्यूनतम फर्श मूल्य की मांग की
  • निर्यात मूल्य को न्यूनतम सीमा से ऊपर होने पर ही अनुमति दी जाए
  • कपास आयात शुल्क में 5 साल की छूट और राज्य स्तर पर प्राथमिकता आपूर्ति की मांग

तिरुप्पुर में वस्त्र निर्माताओं और टेक्सटाइल मिलों का संयुक्त समिति ने केंद्र सरकार से यार्न के न्यूनतम फर्श मूल्य (Minimum Floor Price) तय करने का आग्रह किया है। यह मांग हाल ही में तिरुप्पुर में आयोजित एक बड़े उद्योगिक बैठक में ली गई, जहाँ कपास यार्न की बार-बार और तीव्र कीमत बढ़ोतरी ने उद्योग को गंभीर रूप से प्रभावित किया।

पृष्ठभूमि

तिरुप्पुर, जिसे भारत का "टेक्सटाइल हब" कहा जाता है, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कपड़े निर्यात में प्रमुख भूमिका निभाता है। पिछले दो वर्षों में कपास यार्न की कीमत में 30% से अधिक की उछाल देखी गई, जिससे छोटे और मध्यम आकार के वस्त्र इकाइयों की लागत में असमानता बढ़ी। इस कारण उद्योग ने एक सुसंगत मूल्य संरचना की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्य माँगें

समिति ने चार मुख्य बिंदु प्रस्तुत किए:

  • केंद्रीय सरकार को यार्न निर्यात केवल तब ही अनुमति देनी चाहिए जब निर्यात मूल्य न्यूनतम फर्श मूल्य से ऊपर हो।
  • कपास आयात शुल्क पर पाँच साल की पूर्ण छूट, जिससे मिलों को सस्ती कच्ची सामग्री मिल सके।
  • कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) से तामिलनाडु की मिलों को प्राथमिकता के आधार पर कपास की आपूर्ति।
  • कॉटन को सीधे किसानों से खरीदकर राज्य में मिलों को वितरित करने की व्यवस्था।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that stabilising yarn prices will not only protect profit margins of Tiruppur’s garment sector but also enhance India’s competitiveness in the global apparel market. A predictable cost structure can attract foreign investment and reduce reliance on volatile international cotton markets.

वित्तीय विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह ने कहा: "स्थिर यार्न मूल्य उद्योग की स्थिरता के लिए आवश्यक है और यह निर्यात में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा।"
Did You Know?: तिरुप्पुर हर साल लगभग 1.5 मिलियन कपड़े निर्यात करता है, जो भारत के कुल वस्त्र निर्यात का 15% से अधिक है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: न्यूनतम फर्श मूल्य निर्धारित होने पर यार्न की कीमतें कितनी बार बदलेंगी?
उत्तर: समिति ने प्रस्ताव किया है कि मूल्य हर महीने या दो महीने में एक बार तय किया जाए, न कि बार-बार।

प्रश्न 2: इस नीति से छोटे वस्त्र निर्माताओं को क्या लाभ होगा?
उत्तर: स्थिर कीमतें उत्पादन लागत की पूर्वानुमानितता बढ़ाएंगी, जिससे छोटे उद्योगों को वित्तीय योजना बनाना आसान होगा।