थूथुकुडी जिले के उत्तरी क्षेत्रों में लंबे समय से जारी सूखे और बारिश की कमी ने किसानों की कमर तोड़ दी है। मक्का और कपास जैसी मुख्य फसलों के लिए जमीन तैयार करना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है।
- थूथुकुडी के उत्तरी हिस्सों में बारिश की भारी कमी से कृषि संकट गहराया।
- मक्का और कपास की बुवाई में देरी, जिससे उत्पादन घटने की आशंका।
- एल नीनो के प्रभाव के कारण किसान नई फसल लगाने से कतरा रहे हैं।
- पीने के पानी की भी कमी से ग्रामीण इलाकों में हाहाकार।
थूथुकुडी, तमिलनाडु: थूथुकुडी जिले के उत्तरी भागों में लंबे समय से पड़ रहे भीषण सूखे ने कृषि की संभावनाओं पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। यहाँ के किसान मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी मानसून पर निर्भर हैं, लेकिन पिछले छह महीनों से वर्षा का अभाव खेती के लिए एक गंभीर संकट बन गया है।
आमतौर पर जुलाई और अगस्त में होने वाली हल्की बारिश किसानों को मक्का और कपास की खेती के लिए खेतों को तैयार करने में मदद करती है। हालांकि, इस वर्ष मौसम पूरी तरह शुष्क बना हुआ है, जिससे मिट्टी इतनी सख्त हो गई है कि जुताई और अन्य तैयारी कार्य करना लगभग असंभव हो गया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि थूथुकुडी के पांच ब्लॉकों—ओट्टपीडारम, विलाथिकुलम, कोविलपत्ति, कयाथर और पुदुर—में लगभग 1,45,000 हेक्टेयर वर्षा आधारित कृषि भूमि है। यदि इस सीजन में बुवाई नहीं होती है, तो यह न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था बल्कि क्षेत्रीय खाद्य सुरक्षा को भी प्रभावित कर सकता है।
सूखा और एल नीनो का दोहरा प्रभाव किसानों को जोखिम लेने से रोक रहा है, जिससे कृषि चक्र पूरी तरह बाधित होने का खतरा है।
किसान जॉन केनेडी के अनुसार, पिछले साल भी कम बारिश के कारण भारी नुकसान हुआ था, जिससे किसान अभी तक उबर नहीं पाए हैं। इस बार भी जोखिम लेने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इसके अलावा, कई गांवों में जल निकायों के सूखने से पीने के पानी का संकट भी गहरा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मक्का और कपास के उत्पादन में गिरावट आ सकती है, जिसके परिणामस्वरूप किसान अब मिलेट्स (बाजरा) और अन्य दालों की खेती की ओर रुख कर सकते हैं। खेतों में गहरी दरारें इस बात का प्रमाण हैं कि स्थिति कितनी गंभीर है।
प्रशासनिक प्रयास और भविष्य की योजना
जिला प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए 1,000 लाभार्थियों के लिए कृषि तालाबों (Farm Ponds) का निर्माण शुरू किया है। हालांकि, इन तालाबों का लाभ अगले सीजन से ही मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों का कहना है कि किसानों को वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि वे सूखे के प्रभाव को कम कर सकें।
Frequently Asked Questions
1. थूथुकुडी के किसान किन फसलों को लेकर चिंतित हैं?
किसान मुख्य रूप से मक्का और कपास की खेती को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि सूखे के कारण बुवाई में देरी हो रही है।
2. प्रशासन सूखे से निपटने के लिए क्या कर रहा है?
प्रशासन कृषि तालाबों का निर्माण कर रहा है और किसानों को वैकल्पिक फसलों के लिए प्रशिक्षण दे रहा है।