यूनाइटेड प्लांटर्स एसोसिएशन ऑफ सदर्न इंडिया (UPASI) इस महीने कूनूर में एक तीन दिवसीय महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित करने जा रहा है। इसमें चाय अनुसंधान फाउंडेशन की शताब्दी मनाई जाएगी और उद्योग के विशेषज्ञ भविष्य की तकनीकों पर चर्चा करेंगे।
- यूपीएसीआई चाय अनुसंधान फाउंडेशन की 100वीं वर्षगांठ मनाएगा।
- भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
- कार्यक्रम में टिकाऊ चाय, जलवायु स्मार्ट खेती और कॉफी के नए विकल्पों पर चर्चा होगी।
- 133वीं वार्षिक सम्मेलन और गोल्डन लीफ इंडिया अवार्ड्स भी आयोजित किए जाएंगे।
दक्षिण भारत के प्रमुख बागान संघ, यूनाइटेड प्लांटर्स एसोसिएशन ऑफ सदर्न इंडिया (UPASI), आगामी 21 से 23 सितंबर तक कूनूर में एक ऐतिहासिक तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित करने के लिए तैयार है। यह आयोजन न केवल बागान क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों को एक मंच पर लाएगा, बल्कि चाय और कॉफी उद्योग के भविष्य की दिशा भी तय करेगा।
इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण यूपीएसीआई चाय अनुसंधान फाउंडेशन की शताब्दी वर्षगांठ का उत्सव होगा। इसकी स्थापना 1926 में 'यूपीएसीआई चाय वैज्ञानिक विभाग' के रूप में की गई थी, और अब यह अपने गौरवशाली 100 वर्ष पूरे कर रहा है। उद्घाटन समारोह 21 सितंबर को आयोजित किया जाएगा, जिसमें भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे।
तकनीकी सत्र और वैश्विक भागीदारी
यूपीएसीआई के अध्यक्ष अजय थिपाया ने बताया कि 22 सितंबर को एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में वैज्ञानिक, नीति निर्माता और उद्योग जगत के दिग्गज चार मुख्य स्तंभों पर चर्चा करेंगे: टिकाऊ चाय (Sustainable Tea), जलवायु स्मार्ट चाय (Climate Smart Tea), स्मार्ट चाय (Smart Tea), और चाय क्षेत्र के नए क्षितिज (New Frontiers)।
कार्यक्रम के दूसरे चरण में, 23 सितंबर को विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें सुनील डी. तंगले द्वारा 'पुनर्योजी बागान' (The Regenerative Plantation) और वियतनाम के थाई डांग द्वारा आधुनिक कॉफी परिदृश्य में 'लिबरिका और एक्सेलसा' जैसी वैकल्पिक कॉफी प्रजातियों पर महत्वपूर्ण सत्र होंगे। इसके अलावा, सिंगापुर के मनोज वेम्बु यूरोपीय संघ के नए नियमों (EUDR) के तहत टिकाऊ उत्पादन पर मार्गदर्शन देंगे।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन और वैश्विक व्यापार नियमों (जैसे EUDR) के बढ़ते दबाव के बीच, यह सम्मेलन बागान क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उद्योग को अब केवल उत्पादन पर नहीं, बल्कि स्थिरता और ट्रेसबिलिटी (Traceability) पर ध्यान केंद्रित करना होगा ताकि वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बनी रहे।
चाय और कॉफी उद्योग का भविष्य अब केवल उपज पर नहीं, बल्कि जलवायु अनुकूलन और तकनीकी नवाचार पर निर्भर है।
इसके अतिरिक्त, 23 सितंबर को यूपीएसीआई का 133वां वार्षिक सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा, जहां 'गोल्डन लीफ इंडिया अवार्ड्स' के विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान एक विशाल 'प्लांटेशन एक्सपो' (Plantation Expo) भी लगाया जाएगा, जो नवाचारों को प्रदर्शित करेगा।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: यूपीएसीआई का यह कार्यक्रम कब और कहां आयोजित हो रहा है?
उत्तर: यह कार्यक्रम 21 से 23 सितंबर तक तमिलनाडु के कूनूर में आयोजित किया जा रहा है।
प्रश्न 2: इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य चाय अनुसंधान फाउंडेशन की शताब्दी मनाना और चाय एवं कॉफी क्षेत्र में स्थिरता और नई तकनीकों पर चर्चा करना है।