थोक महंगाई दर (WPI) में बढ़ोतरी के बीच कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा है। जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री का 'सब चंगा है' का दावा जमीनी हकीकत से कोसों दूर है।

  • थोक महंगाई दर (WPI) अगस्त में बढ़कर 9.92% हो गई है।
  • पिछले चार महीनों से WPI दर 10% के करीब बनी हुई है।
  • CMIE के अनुसार, मुद्रास्फीति-समायोजित मजदूरी में अप्रैल से 5.7% की गिरावट आई है।

नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी ने सोमवार को थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के ताजा आंकड़ों पर केंद्र सरकार को कड़ी चुनौती दी है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सब चंगा सी' (सब ठीक है) वाले बयान पर तंज कसते हुए कहा कि वास्तविकता में 'सब महंगा सी' (सब कुछ महंगा है) की स्थिति बनी हुई है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में थोक महंगाई दर बढ़कर 9.92% हो गई है, जो जुलाई में 9.78% थी। खाद्य वस्तुओं, निर्मित वस्तुओं और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने इस उछाल को और हवा दी है। खाद्य सूचकांक में भी वृद्धि देखी गई है, जो जुलाई के 6.65% से बढ़कर अगस्त में 7.05% हो गया है।

महंगाई का गहराता संकट

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि पिछले चार महीनों से WPI महंगाई दर लगातार 10% के आसपास बनी हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में निरंतर वृद्धि से करोड़ों परिवारों को भारी आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थिति को और अधिक गंभीर बनाते हुए, रमेश ने CMIE के आंकड़ों का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि मुद्रास्फीति-समायोजित मजदूरी में अप्रैल से अब तक 5.7% की गिरावट आई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि ग्रामीण भारत में वास्तविक मजदूरी में 9% की भारी गिरावट देखी गई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि थोक स्तर पर बढ़ती कीमतें अंततः खुदरा बाजार और आम आदमी की जेब पर सीधा प्रहार करती हैं। यदि WPI में यह वृद्धि जारी रहती है, तो यह निर्माण लागत को बढ़ाएगी, जिससे अंततः उपभोक्ता वस्तुओं के दाम बढ़ेंगे और मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति कम होगी।

महंगाई और गिरती मजदूरी का यह दोहरा प्रहार भारतीय अर्थव्यवस्था के निचले स्तर पर गंभीर संकट पैदा कर सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यापारिक बाधाओं के कारण कच्चे तेल और उर्वरक की वैश्विक कीमतों में उछाल आया है। इसका सीधा असर भारत में खाद्य कीमतों और उत्पादन लागत पर पड़ रहा है।

Did You Know?: भारत में कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से आता है, और किसी भी वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर आपकी रसोई के बजट पर पड़ता है।

Frequently Asked Questions

1. WPI महंगाई दर क्या है?
WPI यानी थोक मूल्य सूचकांक, यह मापता है कि थोक स्तर पर वस्तुओं की कीमतों में कितना बदलाव आया है।

2. ग्रामीण मजदूरी में गिरावट का क्या मतलब है?
इसका मतलब है कि महंगाई बढ़ने के कारण श्रमिकों की वास्तविक आय कम हो गई है, जिससे वे पहले की तुलना में कम सामान खरीद पा रहे हैं।