रूस के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों के बीच, भारत अब रूस के तेल उत्पादों के आयात का 70% हिस्सा आपूर्ति कर रहा है। हालांकि, भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल के आयात में 24% की कमी देखी गई है।
- भारत रूस के तेल उत्पाद आयात का लगभग 70% हिस्सा आपूर्ति कर रहा है।
- रूस से कच्चे तेल के आयात में अगस्त में 24% की गिरावट आई है।
- यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने रूस के घरेलू रिफाइनिंग बुनियादी ढांचे को प्रभावित किया है।
- भारत अभी भी रूस के जीवाश्म ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है।
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत और रूस के बीच ऊर्जा व्यापार का स्वरूप बदल रहा है। जहाँ एक ओर भारत रूस से कच्चे तेल का आयात कम कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वह रूस के लिए परिष्कृत ईंधन (refined fuel) का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। अगस्त के महीने में, भारत ने रूस के कुल तेल उत्पाद आयात का लगभग 70% हिस्सा प्रदान किया।
यह बदलाव तब देखा जा रहा है जब यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने रूस के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुँचाया है। घरेलू ईंधन की कमी को पूरा करने के लिए, रूस अब भारत जैसे देशों से परिष्कृत उत्पादों पर अधिक निर्भर है। दिलचस्प बात यह है कि इनमें से कई उत्पादों का निर्माण वास्तव में रूसी कच्चे तेल का उपयोग करके ही किया जा रहा है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह व्यापारिक बदलाव भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को दर्शाता है। भारत न केवल अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण 'रिफाइनिंग हब' के रूप में भी अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। रूस से कच्चे तेल के आयात में कमी आना और परिष्कृत उत्पादों का निर्यात बढ़ना भारत के रिफाइनिंग मार्जिन के लिए लाभदायक हो सकता है।
रूस के ऊर्जा संकट ने भारत को कच्चे तेल के खरीदार से बदलकर एक महत्वपूर्ण रिफाइनिंग पार्टनर बना दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अगस्त में लगभग 78 मिलियन यूरो मूल्य का 120,000 टन पेट्रोल निर्यात किया। हालांकि, भारत के कच्चे तेल के आयात में गिरावट आई है। जुलाई के रिकॉर्ड स्तर के बाद, अगस्त में रूसी कच्चे तेल के आयात में 24% की कमी आई।
रिफाइनरी स्तर पर आयात का विवरण
विभिन्न रिफाइनरियों में आयात का पैटर्न अलग-अलग रहा। जहाँ जामनगर रिफाइनरी के आयात में 15% की गिरावट आई, वहीं वाडिनार रिफाइनरी के आयात में 5% की वृद्धि देखी गई। पादपदीप रिफाइनरी में भी मामूली 1% की वृद्धि हुई।
| रिफाइनरी का नाम | आयात में बदलाव (अगस्त) |
|---|---|
| जामनगर रिफाइनरी | 15% की गिरावट |
| वाडिनार रिफाइनरी | 5% की वृद्धि |
| पादपदीप रिफाइनरी | 1% की वृद्धि |
| HMEL मुंद्रा टर्मिनल | 34% की गिरावट |
यह व्यापारिक संबंध काफी जटिल है। उदाहरण के लिए, Nayara Energy की वाडिनार रिफाइनरी, जिसमें रूसी दिग्गज Rosneft की 49.13% हिस्सेदारी है, ने 2026 के पहले आठ महीनों में अपना 100% कच्चा तेल रूस से प्राप्त किया। इन कार्गो को अक्सर मिस्र के पास जहाज-से-जहाज (ship-to-ship) संचालन के माध्यम से स्थानांतरित किया जाता है।
वैश्विक दबाव भी बढ़ रहा है। अमेरिकी सीनेट ने भारत और चीन जैसे देशों सहित रूसी कच्चे तेल के आयातकों पर 100% तक टैरिफ लगाने वाले बिल का समर्थन किया है। इसके बावजूद, भारत रूस के जीवाश्म ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है, जबकि चीन पहले स्थान पर है।
Frequently Asked Questions
1. भारत रूस को क्या निर्यात कर रहा है?
भारत मुख्य रूप से परिष्कृत ईंधन जैसे पेट्रोल और डीजल का निर्यात कर रहा है।
2. क्या भारत का रूसी तेल आयात कम हुआ है?
हाँ, अगस्त में रूसी कच्चे तेल के आयात के मूल्य में लगभग 25% की गिरावट आई है।