भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते के तहत स्टील निर्यात के लिए कोटा बढ़ा दिया गया है, जिससे सालाना 1.64 मिलियन टन स्टील का रास्ता साफ होगा। हालांकि, यूरोपीय संघ का कार्बन टैक्स अभी भी भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ी बाधा बना हुआ है।

  • भारत को यूरोपीय संघ में अब सालाना 1.64 मिलियन मीट्रिक टन स्टील निर्यात करने की अनुमति होगी।
  • मौजूदा WTO कोटा के ऊपर 694,853 टन का अतिरिक्त अधिमान्य कोटा प्रदान किया गया है।
  • कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) के कारण भारतीय स्टील पर भारी कार्बन शुल्क लग सकता है।

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच होने वाले मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के कानूनी पाठ से एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। इस समझौते के तहत, भारत अब यूरोपीय बाजारों में सालाना 1.64 मिलियन मीट्रिक टन तक स्टील निर्यात कर सकेगा। यह कदम भारतीय स्टील उद्योग के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है, क्योंकि यह मौजूदा व्यापार सीमाओं को काफी हद तक विस्तार देता है।

विस्तृत विश्लेषण के अनुसार, यह नया समझौता भारत को मौजूदा 946,616 टन के WTO कोटा के ऊपर 694,853 टन का अतिरिक्त अधिमान्य कोटा प्रदान करता है। यह संयुक्त कोटा भारत के 2025 में यूरोपीय संघ को किए गए कुल 2.4 मिलियन टन स्टील निर्यात का लगभग 68.4% होगा, जो पहले केवल 39.4% था।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह समझौता भारत की वैश्विक व्यापार शक्ति को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, यह केवल एक तरफा जीत नहीं है। समझौते की शर्तों के अनुसार, कोटा से अधिक होने वाले स्टील शिपमेंट पर यूरोपीय संघ द्वारा 50% टैरिफ लगाया जाएगा।

भारतीय स्टील उद्योग के लिए यह अवसर जितना बड़ा है, कार्बन टैक्स की चुनौती उतनी ही गंभीर है।

सबसे बड़ी चिंता का विषय यूरोपीय संघ का कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) है। यह नियम सभी स्टील आयात पर लागू होता है और कोटा मिलने के बावजूद भारतीय निर्यातकों को इससे छूट नहीं मिलती है। Global Trade Research Initiative (GTRI) का अनुमान है कि पूरी तरह लागू होने के बाद, यह कार्बन शुल्क उत्पाद के मूल्य का लगभग 35% तक हो सकता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

वैश्विक व्यापार में, स्टील हमेशा से भू-राजनीतिक शक्ति का प्रतीक रहा है। भारत ने पिछले दशक में अपनी विनिर्माण क्षमता में भारी वृद्धि की है, जिससे वह दुनिया के सबसे बड़े स्टील उत्पादकों में से एक बन गया है। यूरोपीय संघ के साथ यह समझौता भारत को अपनी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में मदद करेगा, लेकिन हरित ऊर्जा की ओर संक्रमण अब अनिवार्य हो गया है।

इस अतिरिक्त कोटा का अधिकांश हिस्सा फ्लैट-स्टील उत्पादों को आवंटित किया गया है, जिसमें हॉट-रोल्ड शीट्स और स्ट्रिप्स को सबसे बड़ा हिस्सा यानी 509,605 टन प्राप्त हुआ है। यह समझौता उम्मीद है कि वर्ष के अंत तक लागू हो जाएगा।

Did You Know?: स्टील उत्पादन दुनिया के कुल CO2 उत्सर्जन का लगभग 7-9% हिस्सा है, यही कारण है कि यूरोपीय संघ इस पर सख्त टैक्स लगा रहा है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या नया कोटा कार्बन टैक्स से सुरक्षा प्रदान करता है?
नहीं, कोटा केवल आयात शुल्क (Tariff) में राहत देता है, लेकिन CBAM के तहत लगने वाले कार्बन टैक्स से कोई छूट नहीं मिलती है।

प्रश्न 2: यह समझौता कब तक लागू होने की उम्मीद है?
उम्मीद है कि भारत-EU FTA वर्ष के अंत तक प्रभावी हो जाएगा।