कर्नाटक के अलंद तालुका के विधायक बी.आर. पाटिल ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत लगभग ₹300 करोड़ मंजूर किए गए थे, लेकिन पूरी राशि किसानों तक नहीं पहुँची। उन्होंने ग्राम सभा और अधिकारियों से त्वरित कार्रवाई की माँग की।

  • लगभग ₹300 करोड़ की मंजूरी के बावजूद पूरी राशि किसानों तक नहीं पहुँची।
  • ग्राम लेखाकारों की लापरवाही और अयोग्य अधिकारियों के कारण बीमा लाभ कटे।
  • विधायक ने ग्राम सभाओं और कड़े अनुशासन की मांग की।

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) भारत में किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए एक प्रमुख सामाजिक सुरक्षा उपाय है। कर्नाटक के अलंद तालुका में इस योजना के तहत लगभग ₹300 करोड़ की राशि स्वीकृत हुई थी, लेकिन कई किसान अभी भी अपने दावे प्राप्त नहीं कर पाए हैं।

विधायक के आरोप

कलाबुरगी में 13 सितंबर को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बी.आर. पाटिल ने बताया कि अलंद में केवल तीन कृषि अधिकारी हैं, जिससे किसानों को पर्याप्त सहायता नहीं मिल पाती। उन्होंने कहा कि ग्राम लेखाकारों की लापरवाही के कारण कई पात्र किसान बीमा लाभ से वंचित रह गए हैं, जबकि तहसीलदार ने इन अधिकारियों की रक्षा करने की कोशिश की।

पाटिल ने हडालगी और येलासांगी गांवों के उदाहरण देकर सवाल उठाया कि समान परिस्थितियों में एक गांव का दावा मंजूर हो गया, तो दूसरे का नहीं। उन्होंने उपजिला अधिकारी को मध्यस्थों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की भी चेतावनी दी।

कर्मचारी कमी और समाधान की माँग

विधायक ने बताया कि कृषि विभाग को पिछले तीन दशकों से कर्मचारियों की कमी झेलनी पड़ रही है, जिससे योजना का कार्यान्वयन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कृषि स्नातक को पदों पर नियुक्त करने और मौजूदा कर्मचारियों को योग्य बनाकर योजना को सुदृढ़ करने की मांग की।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that delays in PMFBY payouts erode farmer confidence, push them towards high‑cost private insurance, and can exacerbate rural indebtedness, threatening food security in Karnataka.

"यदि बीमा दावों की समय पर निकासी नहीं होगी, तो किसानों की आर्थिक स्थिरता संकट में पड़ जाएगी," कृषि नीति विशेषज्ञ डॉ. अनीता सिंह ने कहा।
Did You Know?: भारत में PMFBY ने 2020‑2025 में 1.5 लाख से अधिक किसान को कुल ₹12,000 करोड़ से अधिक का बीमा कवरेज प्रदान किया है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्यों कुछ गांवों में दावे मंजूर हो रहे हैं जबकि अन्य में नहीं?

उत्तर: अक्सर स्थानीय लेखाकारों की अनियमित कार्यप्रणाली, दस्तावेज़ी त्रुटि और मध्यस्थों की हेरफेर के कारण अंतर आता है।

प्रश्न 2: किसानों को इस समस्या का समाधान कैसे मिल सकता है?

उत्तर: ग्राम सभाओं के माध्यम से सीधे शिकायत दर्ज कराना, जिला अधिकारी से त्वरित जांच की मांग करना और मीडिया में मुद्दे को उजागर करना प्रभावी उपाय हैं।