हैदराबाद उपभोक्ता आयोग ने टाटा हैरियर EV में बार-बार तकनीकी खराबी आने के बाद डीलर को वाहन वापस लेने और रिफंड देने का आदेश दिया है। ग्राहक को मानसिक उत्पीड़न के लिए मुआवजे का भी निर्देश दिया गया है।
- टाटा हैरियर EV में स्मार्ट-की और सेंट्रल-लॉकिंग की गंभीर समस्या पाई गई।
- उपभोक्ता आयोग ने डीलर को 10% मूल्य कटौती के बाद रिफंड देने का आदेश दिया।
- ग्राहक को ₹50,000 का मुआवजा और ₹15,000 का कानूनी खर्च दिया जाएगा।
हैदराबाद जिला उपभोक्ता आयोग ने टाटा सिलेक्ट मोटर्स को एक बड़ी राहत देते हुए टाटा हैरियर EV को वापस लेने और ग्राहक को वाहन की कीमत रिफंड करने का सख्त निर्देश दिया है। यह निर्णय वाहन में बार-बार आने वाली तकनीकी खराबी, विशेष रूप से स्मार्ट-की और सेंट्रल-लॉकिंग सिस्टम की विफलता के बाद लिया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि: क्या हुआ था?
शिकायतकर्ता, पवन बागरेचा (M/s Refrigeration Equipment and Solutions), ने 1 अगस्त 2025 को टाटा सिलेक्ट मोटर्स से ₹27.98 लाख में एक 'टाटा हैरियर EV Empowered + 75 APC' खरीदी थी। वाहन की डिलीवरी के कुछ ही दिनों के भीतर, कार बार-बार बंद होने लगी और स्मार्ट-की कनेक्टिविटी में समस्या आने लगी। शिकायत के अनुसार, एक महीने के भीतर चार बार वाहन बीच रास्ते में ही रुक गया था।
डीलर ने शुरुआत में इसे एक 'सॉफ्टवेयर ग्लिच' बताया और मरम्मत का दावा किया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद ग्राहक ने वाहन के बदले नया वाहन या पूरा रिफंड मांगा, जिससे यह मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुँच गया।
BozokMedia विश्लेषण: क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह मामला इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्षेत्र में गुणवत्ता नियंत्रण और ग्राहक सेवा की जवाबदेही के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल है। जैसे-जैसे भारत में EV की मांग बढ़ रही है, निर्माता और डीलर केवल 'सॉफ्टवेयर अपडेट' के भरोसे तकनीकी विफलताओं से बच नहीं सकते। यदि वाहन की बुनियादी सुरक्षा और कार्यात्मक प्रणालियां (जैसे सेंट्रल लॉकिंग) विफल होती हैं, तो यह उपभोक्ता के विश्वास को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
तकनीकी खराबी को केवल सॉफ्टवेयर अपडेट के रूप में देखना ग्राहकों के प्रति लापरवाही है, खासकर जब सुरक्षा से जुड़े सिस्टम विफल हो रहे हों।
आयोग ने पाया कि सर्विस हिस्ट्री और जॉब कार्ड स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि मरम्मत के बावजूद समस्या बनी रही। आयोग ने स्पष्ट किया कि डीलर यह तर्क नहीं दे सकता कि खराबी साबित करने के लिए विशेषज्ञ रिपोर्ट की आवश्यकता है, क्योंकि बार-बार होने वाली विफलता स्वयं एक प्रमाण है।
उपभोक्ता आयोग का अंतिम निर्णय
आयोग ने डीलर को निर्देश दिया है कि वे वाहन वापस लें और 10% मूल्यह्रास (Depreciation) काटने के बाद शेष राशि रिफंड करें। इसके साथ ही, ग्राहक के मानसिक उत्पीड़न के लिए ₹50,000 का मुआवजा और ₹15,000 का कानूनी खर्च देने का भी आदेश दिया गया है। यदि 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है, तो 9% वार्षिक ब्याज लागू होगा।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: आयोग ने रिफंड की राशि कैसे तय की?
उत्तर: आयोग ने वाहन की मूल कीमत में से 10% मूल्यह्रास (depreciation) काटकर शेष राशि रिफंड करने का आदेश दिया है।
प्रश्न 2: क्या डीलर ने निर्माता (Tata Motors) पर दोष मढ़ा?
उत्तर: डीलर ने तर्क दिया कि वे केवल एक अधिकृत डीलर हैं, लेकिन आयोग ने कहा कि दोषपूर्ण वाहन बेचने के लिए डीलर भी जिम्मेदार है।