तमिलनाडु के छोटे कपड़ा मिलों ने कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पुरानी मशीनरी के कारण आर्थिक संकट की चेतावनी दी है। दक्षिण भारत स्पिनर्स एसोसिएशन ने सरकार से आयात शुल्क हटाने और सब्सिडी देने की मांग की है।

  • कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता छोटे कपड़ा मिलों के बंद होने का मुख्य कारण है।
  • आयात शुल्क हटाने और कपास उत्पादन में सहायता की मांग की गई है।
  • आधुनिकीकरण के लिए 25% पूंजीगत सब्सिडी की आवश्यकता है।
  • पिछले पांच वर्षों में लगभग 100 इकाइयां बंद हो चुकी हैं।

तमिलनाडु के कपड़ा उद्योग में एक गहरा संकट मंडरा रहा है। दक्षिण भारत स्पिनर्स एसोसिएशन (South India Spinners Association) के अध्यक्ष आर. अरुणकार्तिक ने चेतावनी दी है कि छोटे कपड़ा मिलों के लिए आर्थिक व्यवहार्यता बनाए रखने हेतु उचित मूल्य पर कच्चे माल की उपलब्धता अनिवार्य है।

एसोसिएशन की वार्षिक बैठक के दौरान, अरुणकार्तिक ने स्पष्ट किया कि कच्चे माल की कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव ही वह प्रमुख कारक है जिसके कारण कई कपड़ा मिलें 'बीमार' (sick) हो रही हैं और बंद होने की कगार पर हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि कपास पर आयात शुल्क को स्थायी रूप से समाप्त कर दिया जाए ताकि घरेलू बाजार में कपास की कीमतें कम हो सकें।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यदि तमिलनाडु के लघु कपड़ा उद्योग को समय रहते समर्थन नहीं मिला, तो यह न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था बल्कि देश के कपड़ा निर्यात को भी भारी नुकसान पहुँचा सकता है। कच्चे माल की अनिश्चितता छोटे उद्यमियों को निवेश करने से रोक रही है।

कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता ही छोटे कपड़ा मिलों के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

अरुणकार्तिक ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि वह कपास की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करे, विशेष रूप से स्वचालन (automation) और गुणवत्तापूर्ण बीजों की खरीद के लिए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने एक 'कपास और फाइबर नीलामी केंद्र' स्थापित करने का सुझाव दिया है, जो विदेशी कंपनियों को स्थानीय मिलों को कच्चा माल बेचने का मंच प्रदान करेगा।

समस्या केवल कच्चे माल तक सीमित नहीं है। वर्तमान में अधिकांश मिलों में मशीनरी 10 से 25 वर्ष पुरानी हो चुकी है। आधुनिकीकरण के लिए भारी पूंजी की आवश्यकता होती है, जिसे वहन करने में छोटे मिल असमर्थ हैं। उन्होंने महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के मॉडल का अनुसरण करते हुए तमिलनाडु सरकार से 25% पूंजीगत सब्सिडी देने की मांग की है।

Did You Know?: तमिलनाडु का कोयंबटूर क्षेत्र भारत का 'मैनचेस्टर' कहलाता है, जो कपड़ा उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: कपड़ा मिलों के बंद होने का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: कच्चे माल की कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव और पुरानी मशीनरी का मुख्य कारण है।

प्रश्न 2: एसोसिएशन ने सरकार से क्या मुख्य मांग की है?
उत्तर: कपास पर आयात शुल्क हटाना और आधुनिकीकरण के लिए 25% सब्सिडी प्रदान करना।