केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि मोदी सरकार के 12 वर्षों में खुदरा मुद्रास्फीति 4.8% रही है, जबकि UPA शासन के दौरान यह 10% के करीब थी। उन्होंने महंगाई बढ़ने के लिए अल नीनो जैसे वैश्विक कारकों को जिम्मेदार ठहराया।
- मोदी सरकार के दौरान उच्चतम खुदरा मुद्रास्फीति 4.8% दर्ज की गई।
- UPA शासन के दौरान महंगाई दर 10% के करीब और अक्सर दो अंकों में थी।
- मंत्री ने महंगाई बढ़ने का मुख्य कारण 'अल नीनो' और प्राकृतिक आपदाओं को बताया।
- भारत की आर्थिक मजबूती और निर्यात में वृद्धि का भी उल्लेख किया गया।
हुबली: केंद्रीय शिक्षा, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने मंगलवार को मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के पिछले 12 वर्षों में खुदरा मुद्रास्फीति का उच्चतम स्तर 4.8% रहा है, जो कि पूर्ववर्ती UPA सरकार के कार्यकाल की तुलना में काफी कम है।
श्री जोशी ने कहा कि UPA शासन के दौरान, सोनिया गांधी और राहुल गांधी के मार्गदर्शन में, महंगाई दर लगभग 8 वर्षों तक 10% के आसपास बनी रही। उन्होंने दावा किया कि उस दौर में मुद्रास्फीति अक्सर दो अंकों (double digits) को पार कर जाती थी और कभी भी एकल अंक (single digit) तक नहीं आ पाई थी।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष महंगाई के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। आर्थिक स्थिरता और खाद्य मुद्रास्फीति का सीधा प्रभाव आम आदमी की जेब पर पड़ता है, इसलिए इन आंकड़ों का राजनीतिक महत्व अत्यधिक है।
मुद्रास्फीति के आंकड़ों का राजनीतिकरण करने के बजाय, हमें इसके पीछे के वैश्विक कारणों जैसे अल नीनो और भू-राजनीतिक संकटों को समझना चाहिए।
मंत्री जोशी ने महंगाई में हालिया वृद्धि के कारणों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि वह खाद्य मुद्रास्फीति की निगरानी करने वाले विभाग के प्रमुख होने के नाते इस मुद्दे के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं। उन्होंने तर्क दिया कि वर्तमान 4.8% की दर के पीछे 'अल नीनो' (El Nino) और अन्य प्राकृतिक आपदाएं जिम्मेदार हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पश्चिम एशिया में संकट शुरू होने से मात्र पांच-छह महीने पहले, मुद्रास्फीति दर केवल 1.5% के आसपास थी।
भारत की आर्थिक स्थिति पर बात करते हुए, उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अत्यंत लचीली रही है। उन्होंने हाल ही में हुए BRICS शिखर सम्मेलन का उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया भर के नेता भारत के आर्थिक प्रदर्शन की सराहना कर रहे हैं।
ऐतिहासिक तुलना
| विशेषता | मोदी सरकार (12 वर्ष) | UPA सरकार (8 वर्ष) |
|---|---|---|
| उच्चतम खुदरा मुद्रास्फीति | 4.8% | ~10% (दो अंकों में भी) |
| आर्थिक स्थिति | लचीली और विकासोन्मुख | अस्थिर मुद्रास्फीति |
अंत में, जोशी ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि वे भारत के आर्थिक प्रदर्शन पर चर्चा करने के बजाय BRICS बैठक के मेनू जैसे तुच्छ मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) और बढ़ता निर्यात वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
Frequently Asked Questions
1. मोदी सरकार के दौरान महंगाई का स्तर क्या रहा है?
मंत्री के अनुसार, मोदी सरकार के 12 वर्षों में उच्चतम खुदरा मुद्रास्फीति 4.8% रही है।
2. प्रल्हाद जोशी ने महंगाई बढ़ने का क्या कारण बताया?
उन्होंने अल नीनो, प्राकृतिक आपदाओं और पश्चिम एशिया में चल रहे संकट को मुख्य कारण बताया है।