दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक भारत, अपने स्वयं के व्हे की कमी के कारण आयात पर निर्भर है। कीमतों में तेज़ वृद्धि और 40% कस्टम ड्यूटी के कारण प्रोटीन सप्लीमेंट महंगे हो रहे हैं, जिससे कर कटौती की तात्कालिक आवश्यकता उभरी है।

मुख्य बिंदु

  • व्हे की कीमतें 2024‑2026 में 108‑139% बढ़ी
  • भारत में व्हे आयात पर 40% कस्टम ड्यूटी और 20% अतिरिक्त कर
  • स्थानीय उत्पादन सीमित, अधिकांश आयातित

प्रोटीन की बढ़ती माँग और व्हे की कमी

ग्लूकोसिन‑लाइक पेप्टाइड‑1 (GLP‑1) दवाओं के उपयोग से वजन घटाने की प्रवृत्ति बढ़ी है, जिससे लोग प्रोटीन सेवन को बढ़ा रहे हैं। मिंटेल के अनुसार, हाई‑प्रोटीन दावा वाले उत्पादों की संख्या 2013 से 2024 के बीच चार गुना बढ़ी है।

प्रोटीन बार, शेक और कुकीज जैसी केंद्रित रूपों का मुख्य घटक व्हे है, जो अब एक महँगा बाय‑प्रोडक्ट बन चुका है। भारत में व्हे की आपूर्ति सीमित है क्योंकि देश में पनीर उत्पादन से निकलने वाला व्हे "एसिड" प्रकार का है, जबकि प्रोटीन पाउडर के लिए आवश्यक "स्वीट" व्हे नहीं मिल पाता।

आयात पर निर्भरता और कर का बोझ

भारत प्रतिवर्ष लगभग 23,000 टन व्हे आयात करता है, जो प्रत्येक वर्ष 20% की गति से बढ़ रहा है। आयातित व्हे की कीमत जुलाई 2025 में ₹1,475/किग्रा से बढ़कर अगले वर्ष ₹3,700/किग्रा हो गई। इसके अलावा, 40% कस्टम ड्यूटी, 20% अतिरिक्त ड्यूटी और 10% वैलफ़ेयर सरचार्ज सहित कुल मिलाकर लगभग 50% मूल्य वृद्धि उत्पन्न हुई है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that high‑priced whey protein hampers nutrition goals for millions of Indians, especially in low‑income groups, and could slow down the country’s ambition to improve overall protein intake.

"यदि सरकार व्हे पर कर घटाए, तो स्थानीय निर्माताओं को निवेश करने का प्रोत्साहन मिलेगा और आयात पर निर्भरता घटेगी," कहते हैं डॉ. रवीना शर्मा, पोषण विशेषज्ञ।
क्या आप जानते हैं?: विश्व स्तर पर सबसे बड़ा दूध उत्पादक होने के बावजूद, भारत 90% से अधिक व्हे आयात करता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या व्हे के कर में कमी से स्थानीय उत्पादन बढ़ेगा?

उत्तर: कर में कमी से निवेशकों को नई प्रक्रिया सुविधाएँ स्थापित करने में प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे घरेलू उत्पादन संभव हो सकता है।

प्रश्न 2: वर्तमान में भारतीय उपभोक्ताओं को प्रोटीन सप्लीमेंट की कीमतें कितनी अधिक हैं?

उत्तर: 2026 में औसत प्रोटीन पाउडर की कीमत लगभग ₹2,500‑₹3,000 प्रति किग्रा है, जो पिछले दो वर्षों में 140% बढ़ी है।