दिल्ली पुलिस ने एआईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या में संलिप्त ताहिर हुसैन और चार अन्य आरोपीों के लिए ‘रैरेस्ट ऑफ रेयर’ के तहत मौत की सज़ा की माँग की है। अभियोजन पक्ष ने अत्यधिक क्रूरता और हिंसा को उजागर किया।

मुख्य बिंदु

  • ताहिर हुसैन और चार सहयोगियों को मौत की सज़ा की सिफ़ारिश की गई।
  • अभियोजन ने केस को ‘रैरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में रखा।
  • डिफेंस ने इस दावे का विरोध किया, कहता है कि कानूनी मानदंड पूरी नहीं हुई।

दिल्ली पुलिस ने रविवार को दिल्ली उच्च अदालत से ताहिर हुसैन, पूर्व आप सांसद, और 2020 के उत्तर‑पूर्व दिल्ली दंगे में इंटेलिजेंस ब्यूरो अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या में संलिप्त चार अन्य अभियुक्तों के लिए मौत की सज़ा की माँग की। पुलिस ने इस हत्या को “भयानक, क्रूर और ठंडे खून से की गई” कहा और इसे ‘रैरेस्ट ऑफ रेयर’ (सबसे दुर्लभ) श्रेणी में रखा।

अभियोजन ने अदालत को बताया कि घटना के दौरान आरोपी “बुटरियों” की तरह व्यवहार कर रहे थे और शिकार की मृत्यु के बाद भी उसके शरीर पर कई घाव रहे। शहीद अधिकारी की लाश केवल अंडरवियर में मिली, जिसमें 51 चोटें दर्ज की गईं, जिनमें से सात सीधे मृत्यु का कारण बनीं और 16 तेज़ हथियारों से लगी थीं।

डिफेंस ने ताहिर हुसैन की वकालत करते हुए कहा कि केस में मृत्युदंड की कानूनी सीमा नहीं पहुंची है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि कई आरोपियों को बरी कर दिया गया और पुलिस ने भी दंगों को नियंत्रित करने में विफलता दिखाई, इसलिए किसी एक व्यक्ति को पूर्ण जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि इस तरह के मामलों में मृत्युदंड का प्रयोग सामाजिक न्याय और कानूनी स्थिरता दोनों को प्रभावित करता है, विशेषकर जब सार्वजनिक हिंसा और सामुदायिक तनाव की बात हो।

"ऐसे मामलों में मृत्युदंड का प्रयोग अत्यंत दुर्लभ और अत्यंत कड़ी सजा के रूप में ही होना चाहिए।"

अदालत ने 13 जुलाई को ताहिर हुसैन और अन्य चार को दोषी ठहराया, यह स्पष्ट करते हुए कि उन्होंने हिंसक भीड़ में भाग लेकर शहीद अधिकारी पर “सभी प्रकार की बर्बरता” की थी। सज़ा सुनाने से पहले अदालत ने आरोपी को उनके सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के विवरण देने का निर्देश भी जारी किया।

क्या आप जानते हैं?: भारत की न्याय प्रणाली में केवल 0.1% मामलों में ही मृत्युदंड दिया गया है, जिससे यह सजा वास्तव में ‘रैरेस्ट ऑफ रेयर’ कहलाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या मृत्युदंड की सिफ़ारिश हमेशा अदालत द्वारा स्वीकृत होती है?
उत्तर: नहीं, अदालत को अभियोजन की सिफ़ारिश के अलावा साक्ष्य और कानूनी मानदंडों के आधार पर निर्णय लेना पड़ता है।

प्रश्न 2: इस केस में किन अन्य धारा के तहत आरोप लगाए गए हैं?
उत्तर: हत्या, अपहरण, दंगे, जातीय द्वेष को बढ़ावा देना, सार्वजनिक अधिकारी के आदेश का उल्लंघन और अवैध सभा।