राजस्थान में साइबर अपराध का जाल तेजी से फैल रहा है, जहां पुलिस ने 82,000 से अधिक 'म्यूल अकाउंट्स' की पहचान की है। गरीब मजदूर और छात्र अनजाने में या लालच में आकर अपने खातों का इस्तेमाल ठगी के पैसे मंगाने के लिए कर रहे हैं।
- जनवरी से जुलाई 2026 के बीच राजस्थान में 82,407 'म्यूल अकाउंट्स' की पहचान की गई।
- ठगों ने गरीब मजदूरों और छात्रों को सरकारी योजनाओं का झांसा देकर उनके खाते हासिल किए।
- धोखाधड़ी का पैसा दुबई और कुवैत जैसे देशों में बैठे अपराधियों तक पहुंचाने के लिए इन खातों का उपयोग किया जा रहा है।
राजस्थान पुलिस के लिए साइबर अपराध से निपटना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 'म्यूल अकाउंट्स' (Mule Accounts) का उपयोग साइबर ठगों द्वारा अवैध धन के लेन-देन के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। राजस्थान पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों से पता चलता है कि 1 जनवरी से 12 जुलाई 2026 के बीच, राज्य भर में 82,407 ऐसे खातों की पहचान की गई है, जिनका उपयोग धोखाधड़ी के पैसे को रूट करने के लिए किया जा रहा है।
इस दौरान पुलिस ने 723 मामले दर्ज किए हैं और 657 लोगों को गिरफ्तार किया है। साइबर सेल के डीआईजी शांतनु कुमार ने बताया कि कई मामलों में लोग नासमझी या पैसों के लालच में आकर अपने बैंक विवरण ठगों को सौंप देते हैं। एक बार पकड़े जाने पर, इन खाताधारकों को भी अपराध में साजिश रचने के तहत कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह समस्या केवल स्थानीय नहीं है, बल्कि एक वैश्विक नेटवर्क का हिस्सा है। अपराधी इन खातों का उपयोग 'मनी लॉन्ड्रिंग' के लिए एक ढाल के रूप में करते हैं, जिससे असली मास्टरमाइंड तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है।
"लोग सीधे साइबर धोखाधड़ी में शामिल नहीं होते, लेकिन वे अपने खातों को किराए पर देकर अनजाने में एक बड़े आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा बन जाते हैं।"
डूंगरपुर का हालिया मामला इस खतरे की भयावहता को दर्शाता है, जहां पुलिस ने लगभग ₹160 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन से जुड़े 450 म्यूल अकाउंट्स का खुलासा किया है। जांच में पाया गया कि बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से गरीब मजदूरों और छात्रों को छात्रवृत्ति और मुफ्त पैन कार्ड के नाम पर बहलाया गया। इन खातों के माध्यम से स्टॉक मार्केट, क्रिप्टोकरेंसी और सट्टेबाजी से जुड़ी धोखाधड़ी का पैसा दुबई और कुवैत के अपराधियों तक पहुंचाया जा रहा था।
बाड़मेर जैसे जिलों में भी एजेंट सक्रिय हैं जो ₹8,000 से ₹10,000 के बदले लोगों के बैंक दस्तावेज और पासबुक ले लेते हैं। पुलिस अब न केवल खाताधारकों बल्कि उन एजेंटों और अंतरराष्ट्रीय संचालकों पर भी नकेल कसने की कोशिश कर रही है जो टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म का उपयोग करके इस नेटवर्क को संचालित करते हैं।
Frequently Asked Questions
1. 'म्यूल अकाउंट' क्या होता है?
म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है जिसका उपयोग किसी तीसरे पक्ष द्वारा अवैध धन प्राप्त करने या उसे स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है, अक्सर खाताधारक की मिलीभगत या धोखे से।
2. यदि मैं अपना खाता किसी को दे दूँ, तो क्या मैं अपराधी माना जाऊंगा?
हाँ, कानून के तहत यदि आप जानबूझकर अपने खाते का उपयोग अवैध गतिविधियों के लिए करने देते हैं, तो आप पर साजिश रचने का आरोप लग सकता है।
| क्षेत्र | पहचाने गए म्यूल अकाउंट्स | मुख्य शिकार समूह |
|---|---|---|
| राजस्थान (राज्यwide) | 82,407 | मजदूर, छात्र, ग्रामीण आबादी |
| डूंगरपुर मामला | ~450 | छात्र, गरीब श्रमिक |