दिल्ली हाई कोर्ट के विशेष फास्ट‑ट्रैक कोर्ट में NEET पेपर लीक मामले की पहली सुनवाई सीबीआई के वकील के न आने के कारण स्थगित कर दी गई। न्यायालय ने अब दो अभियुक्तों की जमानत सुनवाई 3 अगस्त को निर्धारित की है, जबकि कांग्रेस ने सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
मुख्य बिंदु
- सीबीआई के वकील ने सुनवाई में हाज़री नहीं दी।
- जमानत की याचिकाएँ 3 अगस्त को सुनी जाएँगी।
- कांग्रेस ने फास्ट‑ट्रैक कोर्ट को समाधान बताने पर सरकार की आलोचना की।
इतिहासिक पृष्ठभूमि
NEET‑UG परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई, पर प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने इसे 12 मई को रद्द कर दिया। नई परीक्षा 21 जून को हुई और परिणाम इस महीने जारी हुए। इस घटना ने भारत में सार्वजनिक परीक्षा सुरक्षा को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी।
वर्तमान स्थिति
विशेष जज अनु ग्रोवर बालिगा ने 27 जुलाई को सुनवाई स्थगित कर दी, क्योंकि सीबीआई के प्रतिनिधि 10:45 बजे तक नहीं आए। आरोपियों दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की जमानत याचिकाएँ अब 3 अगस्त को सुनी जाएँगी। अदालत ने अभियोजन निदेशक को निर्देश दिया कि भविष्य की कार्यवाही में एक सार्वजनिक अभियोजक उपस्थित रहे।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
कांग्रेस के महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने X पर पोस्ट कर कहा, “ऐसे में मोदी सरकार किस चेहरे से ढोल बजा रही है, फास्ट‑ट्रैक कोर्ट को समाधान बता रही है, जबकि सीबीआई की अनुपस्थिति स्पष्ट करती है कि जांच में कोई गंभीरता नहीं है।”
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the delay undermines public confidence in the fast‑track mechanism and raises questions about the coordination between investigative agencies and the judiciary in high‑profile education fraud cases.
“फास्ट‑ट्रैक कोर्ट की प्रभावशीलता तभी सिद्ध होगी जब सभी पक्ष, विशेषकर सीबीआई, समय पर सहयोग करें,” कहा कानूनी विशेषज्ञ प्रो. अंजली कापूर।
Did You Know?
Frequently Asked Questions
- क्या फास्ट‑ट्रैक कोर्ट की सुनवाई फिर से स्थगित हो सकती है? हाँ, यदि सीबीआई या किसी अन्य पक्ष की उपस्थिति सुनिश्चित नहीं हुई तो आगे भी स्थगन संभव है।
- NEET पेपर लीक के लिए अब तक कितने लोगों पर आरोप लगे हैं? अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें दो डॉक्टर और कई मध्यस्थ शामिल हैं।