प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अमीरा प्योर फूड्स मामले में सिंगापुर बैंक में रखे ₹94.76 करोड़ के विदेशी फंड को कुर्क कर लिया है। यह कार्रवाई बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के बीच की गई है।

मुख्य बिंदु

  • ईडी ने सिंगापुर बैंक में ₹94.76 करोड़ की विदेशी संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क किया।
  • मुख्य आरोपी करण चनना और अन्य संस्थाओं के नाम पर यह राशि रखी गई थी।
  • अमीरा फूड्स पर ₹1,201.85 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी का आरोप है।
  • कोर्ट ने मुख्य आरोपियों को 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी' घोषित कर दिया है।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अमीरा प्योर फूड्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े एक कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी सफलता हासिल की है। एजेंसी ने बैंक ऑफ सिंगापुर में रखे लगभग ₹94.76 करोड़ के विदेशी बैंक खातों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। यह कार्रवाई यूके और सिंगापुर के साथ पारस्परिक कानूनी सहायता संधि (MLAT) तंत्र के माध्यम से की गई है।

जांच के अनुसार, यह राशि मुख्य आरोपी करण चनना, अमीरा फूड्स पीटीई लिमिटेड और अनंत्या पीटीई लिमिटेड के नाम पर रखी गई थी। ईडी की यह कार्रवाई सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की गई थी, जिसमें आरोप है कि कंपनी के निदेशकों और प्रमोटरों ने धन का गबन किया और धोखाधड़ी की।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला बैंकिंग क्षेत्र में बड़े पैमाने पर होने वाली धोखाधड़ी को उजागर करता है। अमीरा फूड्स ग्रुप, जो विशेष रूप से भारतीय बासमती चावल के व्यापार में था, का ऋण खाता 2007 में गैर-निष्पादित संपत्ति (NPA) में बदल गया था। कंपनी पर केनरा बैंक के नेतृत्व वाले ऋणदाताओं के समूह को लगभग ₹1,201.85 करोड़ का नुकसान पहुंचाने का गंभीर आरोप है।

वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में विदेशी संपत्तियों की कुर्की वैश्विक सहयोग और सख्त कानूनी ढांचे की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

जांच एजेंसी ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की है। अदालत ने पाया कि करण चनना और अनीता डेंग भारत छोड़कर यूके और यूएई में रह रहे थे और जानबूझकर भारत नहीं लौटे। परिणामस्वरूप, अदालत ने उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया और हरियाणा में स्थित 46 अचल संपत्तियों को जब्त करने का आदेश दिया, जिनकी कीमत लगभग ₹123 करोड़ है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

अमीरा फूड्स ग्रुप भारतीय बासमती चावल के बाजार में एक प्रमुख नाम था। 2007 में वित्तीय संकट पैदा होने के बाद, यह मामला लंबे समय तक कानूनी लड़ाई का विषय बना रहा। पिछले कुछ वर्षों में, ईडी ने इस मामले में पहले ही ₹131.51 करोड़ की संपत्ति कुर्क की है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: अमीरा प्योर फूड्स पर मुख्य आरोप क्या है?

उत्तर: कंपनी पर धन का गबन करने, धोखाधड़ी करने और बैंकों को ₹1,201.85 करोड़ का नुकसान पहुंचाने का आरोप है।

प्रश्न 2: आरोपियों को 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी' क्यों घोषित किया गया?

उत्तर: क्योंकि मुख्य आरोपी भारत छोड़कर विदेशों में रह रहे थे और कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के लिए वापस लौटने में विफल रहे।

क्या आप जानते हैं?: भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम का उपयोग उन लोगों की संपत्तियों को जब्त करने के लिए किया जाता है जो बड़े वित्तीय अपराध करके देश से भाग जाते हैं।