छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने आठ साल के लड़के की हिरासत माँ से पिता को दे दी, क्योंकि बच्चा स्वयं पिता और सौतेली माँ के साथ रहना चाहता था। कोर्ट ने माँ के अभ्यर्थना को अस्वीकार कर visitation अधिकार बरकरार रखे।

मुख्य बिंदु

  • अदालत ने माँ की हिरासत याचिका खारिज की
  • बच्चे ने पिता और सौतेली माँ के साथ रहने की इच्छा जताई
  • माँ को सीमित विज़िटेशन अधिकार दिया गया

पृष्ठभूमि

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 22 जुलाई को जारी आदेश में यह कहा कि आठ वर्षीय लड़के ने स्वयं अपने पिता और सौतेली माँ के साथ रहने की इच्छा व्यक्त की है। दोनों अभिभावकों का 2016 में तलाक हुआ था और दोनों ने पुनः विवाह कर नए जीवन स्थापित किए हैं।

माँ ने 1890 के गार्डियंस एंड वार्ड्स एक्ट तथा 1956 के हिन्दू अल्पसंख्यक एवं अभिरक्षक अधिनियम के तहत अपने बेटे की हिरासत का दावा किया था, यह तर्क देते हुए कि पिता केवल चालक है और बच्चे की देखभाल में असमर्थ है।

विरोधी पक्ष ने बताया कि पिता ने बच्चे को उचित देखभाल, शिक्षा और ध्यान दिया है, जबकि माँ ने भी नया विवाह करके एक बेटे को जन्म दिया है, जिससे बच्चे को सौतेली माँ द्वारा दुर्व्यवहार का डर था।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि भारतीय अभिरक्षक कानून में बच्चे की इच्छा को प्राथमिकता देना एक महत्वपूर्ण मानदंड है, विशेषकर जब दोनों अभिभावक सक्षम हों। यह फैसला भविष्य में समान मामलों में न्यायिक दिशा-निर्देश स्थापित कर सकता है।

परिवार कानून विशेषज्ञ डॉ. अंजलि मेहता का कहना है, “बच्चे की व्यक्त की गई इच्छा भारतीय हिरासत कानून में निर्णायक कारक है।”

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में अभिरक्षक मामलों में 1973 की बाल अधिकार संधि और विभिन्न उच्च न्यायालयों के फैसले यह स्थापित करते हैं कि बच्चे की भलाई और उसकी इच्छा सर्वोपरि हैं। पहले कई मामलों में आर्थिक स्थिति को प्राथमिकता दी गई थी, परन्तु हाल के रुझान में भावनात्मक बंधन और बच्चे की पसंद को अधिक महत्व दिया जा रहा है।

Did You Know?: भारत में 2019 के एक सर्वेक्षण में 68% माता-पिता मानते हैं कि अदालतें अक्सर बच्चे की इच्छा को नजरअंदाज करती हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या माँ को फिर से हिरासत के लिए आवेदन करने का अधिकार है?
उत्तर: हाँ, यदि भविष्य में बच्चे की सुरक्षा या कल्याण में बदलाव आता है तो वह पुनः आवेदन कर सकती हैं।

प्रश्न 2: पिता की नौकरी (ड्राइवर) बच्चे की शिक्षा पर असर डालती है क्या?
उत्तर: कोर्ट ने माना कि आर्थिक आय से अधिक बच्चे को मिलने वाली देखभाल और शिक्षा अधिक महत्वपूर्ण हैं।