बेंगलुरु के एक डॉक्टर पर अपनी ही कर्मचारी के साथ पेपर स्प्रे का उपयोग कर दुष्कर्म करने, वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने और जातिसूचक गालियां देने का गंभीर आरोप लगा है। पुलिस ने बीएनएस और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।
- बेंगलुरु के एक डॉक्टर पर पेपर स्प्रे के जरिए महिला कर्मचारी को बेहोश कर दुष्कर्म का आरोप।
- आरोपी ने कथित तौर पर यौन शोषण का वीडियो बनाकर पीड़िता को ब्लैकमेल किया।
- पीड़िता के एससी/एसटी समुदाय से होने पर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग और अपमान का आरोप।
- मामले की जांच अब नागरिक अधिकार प्रवर्तन निदेशालय (DCRE) को सौंपी गई है।
बेंगलुरु में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है जहाँ एक प्रतिष्ठित डॉक्टर पर अपनी ही लैब में काम करने वाली 30 वर्षीय महिला के साथ क्रूरता और यौन शोषण का आरोप लगा है। पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) के अनुसार, यह घटना 15 दिसंबर, 2025 को शुरू हुई, जब आरोपी डॉक्टर ने पीड़िता को फाइलों की तलाश के बहाने अपनी डायग्नोस्टिक लैब में बुलाया और उसके चेहरे पर पेपर स्प्रे छिड़क दिया, जिससे वह बेहोश हो गई।
पीड़िता का आरोप है कि जब उसे होश आया, तो उसने खुद को निर्वस्त्र पाया। जब उसने डॉक्टर से इस बारे में सवाल किया, तो आरोपी ने उसे धमकी दी कि उसने इस पूरी घटना का वीडियो बना लिया है और यदि उसने किसी को बताया, तो वह इसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर देगा। इस डर और मानसिक दबाव के चलते पीड़िता लंबे समय तक उसके चंगुल में फंसी रही।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला (BozokMedia विश्लेषण)
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल यौन हिंसा का नहीं है, बल्कि यह कार्यस्थल पर शक्ति के दुरुपयोग (Power Dynamics) और सामाजिक भेदभाव के खतरनाक मेल को दर्शाता है। एक चिकित्सा पेशेवर द्वारा अपनी ही कर्मचारी की मजबूरी और डर का फायदा उठाना स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में विश्वास की कमी को उजागर करता है। इसके अलावा, एससी/एसटी एक्ट का समावेश यह दर्शाता है कि आरोपी ने न केवल शारीरिक बल्कि सामाजिक पहचान पर भी हमला किया है।
"कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मामलों में जब ब्लैकमेलिंग और जातिगत भेदभाव जुड़ जाता है, तो यह पीड़िता के लिए न्याय की राह को और अधिक कठिन बना देता है।"
शिकायत के अनुसार, डॉक्टर ने बाद में एक घर किराए पर लिया और वहां पीड़िता का बार-बार यौन शोषण किया। वह लगातार उसे वीडियो के जरिए धमकाता रहा ताकि वह चुप रहे। मामला तब और बिगड़ गया जब 2 जुलाई, 2026 को डॉक्टर को पता चला कि पीड़िता अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) समुदाय से है। इसके बाद उसने पीड़िता के खिलाफ जातिसूचक शब्दों का उपयोग किया और उसे नौकरी से निकालने की धमकी दी।
क्षेत्राधिकार पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दुष्कर्म, आपराधिक धमकी और जानबूझकर अपमान करने की धाराओं के साथ-साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
चूंकि इस मामले में एससी/एसटी अधिनियम के तहत गंभीर अपराध शामिल हैं, इसलिए मामले की गहन जांच के लिए इसे नागरिक अधिकार प्रवर्तन निदेशालय (Directorate of Civil Rights Enforcement) को स्थानांतरित कर दिया गया है। पुलिस फिलहाल आरोपी की तलाश कर रही है, हालांकि अभी तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. यह घटना कब और कहाँ हुई?
यह घटना बेंगलुरु में एक डायग्नोस्टिक लैब में शुरू हुई, जिसकी पहली बड़ी वारदात 15 दिसंबर, 2025 को हुई थी।
2. आरोपी डॉक्टर पर कौन सी धाराएं लगाई गई हैं?
आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दुष्कर्म और धमकी की धाराओं के साथ-साथ एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।