कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 291 एकड़ की भूमि अतिक्रमण जांच के लिये गठित विशेष जाँच टीम (SIT) के आदेश को स्थगित कर दिया। अदालत ने प्रक्रिया में त्रुटियों को उजागर किया, जबकि आश्रम ने सभी आरोपों को झूठा ठहराया।
मुख्य बिंदु
- कर्नाटक हाई कोर्ट ने SIT के गठन को स्थगित किया।
- सरकारी सर्वेक्षण ने 291 एकड़ की अतिक्रमण की रिपोर्ट दी।
- आश्रय संस्थान ने सभी आरोपों को निराधार कहा।
कोर्ट का आदेश
जस्टिस ई. एस. इंदिरेश ने 31 जुलाई को एक अंतरिम आदेश जारी किया, जिसमें 17 जुलाई 2026 को जारी सरकारी आदेश को रोक दिया गया। यह आदेश वेद विज्ञान महाविद्या पीठ ट्रस्ट द्वारा दायर याचिका पर आधारित था, जो स्वयं को अतिक्रमण का आरोपित समूह मानता है।
सर्वेक्षण एवं आरोप
ऑक्टोबर 2025 के एक सर्वेक्षण ने बताया कि कागलिपुरा गांव, बेंगलुरु के 291 एकड़ सरकारी भूमि, जलाशयों और जल निकासी प्रणालियों पर अतिक्रमण हुआ है। सरकार ने कहा कि आश्रम ने लीज़ के बाहर अतिरिक्त भूमि पर निर्माण किया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
आर्ट ऑफ़ लिविंग फ़ाउंडेशन, जो श्री श्री रवि शंकर द्वारा स्थापित है, पिछले कई सालों से विभिन्न भूमि विवादों में रहा है। 2023 में इसी प्रकार की एक याचिका दायर हुई थी, जिसमें कहा गया था कि संस्थान ने जल निकासी नाली और तालाब पर इमारतें बनाईं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the ruling highlights procedural lapses in land‑revenue enforcement and could set a precedent for how spiritual organisations are scrutinised under public‑interest litigation.
"यदि प्रक्रिया में त्रुटि रही तो न्यायपालिका को हस्तक्षेप करना आवश्यक है," कहा कानूनी विश्लेषक अंजलि सिंह ने।
Frequently Asked Questions
Q: विशेष जांच टीम (SIT) क्या करती है?
A: यह टीम भूमि विवाद, सार्वजनिक संसाधनों के अतिक्रमण और सरकारी आदेशों के उल्लंघन की जांच करती है।
Q: इस निर्णय का आश्रम की दैनिक गतिविधियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
A: वर्तमान में कोई तत्काल प्रतिबंध नहीं है, लेकिन आगे की सुनवाई में संचालन पर प्रतिबंध लग सकता है।