विजयनगर जिले में एक 36 वर्षीय निर्माण कार्यकर्ता को पत्नी के साथ झगड़े के बाद पुलिस हिरासत में ले लिया गया और वह रात भर के बाद मर गया। दो कांस्टेबल को इस कस्टोडियल मौत के लिए गिरफ्तार किया गया है।
मुख्य बिंदु
- विजयनगर में कस्टोडियल मौत, दो पुलिसकर्मी गिरफ्तार
- परिवार ने पुलिस पर अत्याचार का आरोप लगाया
- कर्नाटक में पिछले पाँच वर्षों में कुल 25 कस्टोडियल मौतें दर्ज
घटना की विवरण
विजयनगर जिले के हगरिबोम्मनहली थाने में 36 वर्षीय निर्माण कार्यकर्ता खलीलुल्लाह को उसकी पत्नी सहिनाज के साथ झगड़े के बाद रात भर हिरासत में रखा गया। अगले दिन सुबह अस्पताल ले जाने पर वह मृत पाया गया।
पुलिस कार्रवाई
जिला सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस एस. जाह्नवी ने बताया कि हगरिबोम्मनहली थाने के हेड कांस्टेबल राघवेंद्र और कांस्टेबल वेंकटेश को कस्टोडियल मृत्यु के आरोप में रविवार को गिरफ्तार किया गया। यह गिरफ्तारी खलीलुल्लाह की पत्नी के शिकायत के बाद हुई।
परिवार और विधायक की प्रतिक्रिया
हगरिबोम्मनहली विधायक नेमिराज नाइक ने कहा कि यह जिले में पहली कस्टोडियल मौत है और उन्होंने थाने में स्थापित सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने की मांग की। परिवार ने पुलिस द्वारा शारीरिक अत्याचार का आरोप लगाया।
राष्ट्रीय आँकड़े और पिछले वर्ष की तुलना
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 2021-2026 तक भारत में 806 कस्टोडियल मौतें दर्ज हुईं। कर्नाटक में 2021-22 में 8, 2022-23 में 5, 2023-24 में 7, 2024-25 में 2 और 2025-26 (मार्च तक) में 3 मौतें हुईं। महाराष्ट्र ने सबसे अधिक 101 केस दर्ज किए।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में कस्टोडियल मौतें लंबे समय से मानवाधिकार संगठनों की चिंता का विषय रही हैं। 2000 के बाद से कई उच्च-प्रोफ़ाइल मामलों में पुलिस द्वारा अत्याचार के आरोप सामने आए हैं, जिससे न्यायिक सुधार और सीसीटीवी निगरानी की मांग बढ़ी है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that repeated custodial deaths erode public trust in law enforcement and highlight systemic gaps in police accountability across Indian states.
"हिरासत में मौतें केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि पुलिस प्रोटोकॉल की विफलता का संकेत हैं," मानवाधिकार वकील अनीता राव ने कहा।
Frequently Asked Questions
- क्या पुलिस को कस्टोडियल मौतों के लिए सख़्त सजा मिलती है? वर्तमान में कई मामलों में न्यायिक प्रक्रिया लंबी और जटिल होती है, जिससे सजा में देरी होती है।
- कैसे सुनिश्चित किया जाए कि थाने में सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रहे? स्वतंत्र निगरानी एजेंसियों को फुटेज की संग्रहण और ऑडिट प्रक्रिया की जिम्मेदारी सौंपना एक संभावित कदम है।