सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सिविल सर्विसेज प्रीलिम्स में कथित परीक्षा अनियमितताओं की स्वतंत्र और समयबद्ध सीबीआई जांच का आदेश माँगा। केंद्र एवं राज्य सरकार को लिखित उत्तर देने को कहा गया।
- सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड परीक्षा में अनियमितताओं की सीबीआई जांच का आदेश दिया।
- केंद्र और झारखंड सरकार को लिखित जवाब देने का समय सीमा निर्धारित।
- परीक्षा प्रक्रिया के सभी चरणों की फोरेंसिक जांच की मांग की गई।
पृष्ठभूमि
झारखंड संयुक्त सिविल सर्विसेज प्रारम्भिक परीक्षा में प्रश्नपत्र तैयार, ओएमआर शीट्स के संभाल और इलेक्ट्रॉनिक डेटा के कई पहलुओं पर गंभीर आरोप लगे थे। राज्य ने परीक्षा रद्द कर दी, परंतु झारखंड उच्च न्यायालय ने इस निर्णय को स्थगित कर दिया, जिससे छात्रों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किया।
अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने याचिकाकर्ता हरीशरण देवगन के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें सीबीआई द्वारा स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की माँग की गई।
सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में एक पैनल ने केंद्र और झारखंड सरकार दोनों को लिखित उत्तर देने का निर्देश दिया। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जाँच में फोरेंसिक विशेषज्ञों की भागीदारी अनिवार्य होगी।
न्यायाधीश जॉयमाल्य बागची और वी मोहना ने परीक्षा के संचालन के विभिन्न पहलुओं पर प्रश्न उठाए, जैसे कि प्रश्नपत्र का कोडिंग, भंडारण, वितरण, ओएमआर शीट्स की सुरक्षा, स्कैनिंग एवं परिणाम प्रकाशन।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that a transparent investigation could set a precedent for handling examination scandals across India, reinforcing public trust in competitive recruitment processes.
"एक स्वतंत्र सीबीआई जाँच ही इस तरह के बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी को रोक सकती है," कहा एक चुनावी विशेषज्ञ ने।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या सीबीआई जांच के बाद परीक्षा फिर से आयोजित की जाएगी?
उत्तर: कोर्ट अभी तक इस पर निर्णय नहीं लेगा; यह जांच के परिणाम पर निर्भर करेगा।
प्रश्न 2: जांच में किन दस्तावेज़ों को संरक्षित किया जाएगा?
उत्तर: मूल ओएमआर शीट्स, सीसीटीवी फुटेज, सर्वर ऑडिट लॉग और सभी डिजिटल डेटा को तुरंत संरक्षित किया जाएगा।