केरल हाई कोर्ट ने 19 वर्षीय छात्रा की याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने NTA को परिणाम घोषित होने से तीन दिन पहले अंतिम उत्तर कुंजी प्रकाशित करने और प्रश्नों को चुनौती देने का निर्देश मांगा था। कोर्ट ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उसकी भूमिका शैक्षणिक विशेषज्ञों के फैसलों को पुनः जांचने तक सीमित है।
मुख्य बिंदु
- केरल हाई कोर्ट ने NEET‑UG उत्तर कुंजी को परिणाम घोषणा से पहले चुनौती देने की याचिका को अस्वीकार किया।
- न्यायालय ने विशेषज्ञ समिति के निर्णयों में हस्तक्षेप करने की सीमित अधिकारिता पर बल दिया।
- NTA की सार्वजनिक सूचना के अनुसार अंतिम उत्तर कुंजी प्रकाशित होने के बाद कोई आपत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी।
कोर्ट का निर्णय
16 जुलाई 2026 को, न्यायाधीश मुराली कृष्णा एस ने कहा कि अदालत संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अत्यधिक अधिकार का प्रयोग करके विषय विशेषज्ञों के निर्णय पर अपील नहीं कर सकती। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उत्तर कुंजी पर कोई बुरे इरादे (malafides) का प्रमाण नहीं मिला है।
याचिकाकर्ता की मांगें
19 वर्षीय छात्रा ने 28 जून 2026 को NTA को छह प्रश्नों के संबंध में आपत्तियां भेजी थीं और चाहता था कि ये प्रश्न विशेषज्ञ समिति के सामने रखे जाएँ, तथा परिणाम घोषणा से पहले अंतिम उत्तर कुंजी प्रकाशित हो। वह सर्वर लॉग्स के संरक्षण की भी मांग कर रही थी।
विपक्षी तर्क
NTA के वरिष्ठ वकील निर्मल एस ने बताया कि उत्तर कुंजी विशेषज्ञों की समीक्षा के बाद तैयार की जाती है और न्यायालय को शैक्षणिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार किया और याचिका खारिज कर दी।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this ruling reinforces the separation between judicial oversight and technical expertise in India's high‑stakes entrance examinations, setting a precedent for future challenges to answer keys.
"Courts must respect the autonomy of exam‑setting bodies to maintain the integrity of competitive examinations," noted legal scholar Dr. Ananya Rao.
Frequently Asked Questions
- क्या छात्र अब भी उत्तर कुंजी पर आपत्ति कर सकते हैं? नहीं, क्योंकि NTA ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि अंतिम उत्तर कुंजी प्रकाशित होने के बाद कोई आपत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी।
- क्या भविष्य में कोई समान याचिका दायर की जा सकती है? संभव है, लेकिन अदालत को विशेषज्ञों के निर्णय में सीमित हस्तक्षेप का सम्मान करना पड़ेगा।