दिल्ली के उपभोक्ता विवाद आयोग ने एक किराना दुकान को बासी और कीड़े लिपटे सोअन पपड़ी बेचने के लिए ₹15,000 की क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया। यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा मानकों के कड़ाई से पालन की पुष्टि करता है।
मुख्य बिंदु
- दिल्ली की उपभोक्ता आयोग ने किराना दुकान को 1,250 रुपये के साथ 7% वार्षिक ब्याज और अतिरिक्त ₹15,000 मुआवजा देने का आदेश दिया।
- बासी और कीड़ों से ग्रस्त सोअन पपड़ी को बेचना स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है।
- उपभोक्ताओं को ताज़ा, सुरक्षित और सही लेबल वाली खाद्य वस्तु मिलने का अधिकार है।
पृष्ठभूमि
शिकायतकर्ता ने 26 अक्टूबर 2024 को एक किराना स्टोर से लगभग एक दर्जन ड्राई फ्रूट पैकेट और 45 बॉक्स सोअन पपड़ी खरीदी, जिन्हें वह दीवाली उपहार के रूप में वितरित करना चाहता था। प्राप्त मिठाइयों को बासी, गंधहीन, पाउडरयुक्त और कीड़े से ग्रस्त बताया गया, तथा पैकेज की मूल उत्पादन तिथि मिटा कर नई 2024 की तिथि चिपकाई गई थी।
शिकायतकर्ता ने मिठाइयों को लौटाया, पर दुकान मालिक ने उन्हें बदलने का वादा तो किया, लेकिन कार्रवाई नहीं की। शिकायतकर्ता ने खुद भी कुछ बॉक्स प्रमाण के रूप में रखे और कर्मचारियों को बदले में मिलने वाले नुकसान के लिए मुआवजा मांगा।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that consumer confidence in traditional festive sweets can erode quickly when quality standards are compromised, prompting stricter regulatory oversight and heightened awareness among shoppers.
"Food safety violations, especially during festivals, not only harm health but also damage cultural trust," says food‑law expert Dr. Ananya Rao.
Frequently Asked Questions
क्या उपभोक्ता को बासी मिठाई मिलने पर रिफंड का अधिकार है? हाँ, उपभोक्ता को ताज़ा और सुरक्षित खाद्य वस्तु मिलने का अधिकार है और विक्रेता को रिफंड या मुआवजा देना अनिवार्य है।
किराना दुकान को इस निर्णय के बाद क्या करना होगा? उन्हें 1,250 रुपये की कीमत पर 7% वार्षिक ब्याज के साथ रिफंड देना होगा और साथ ही ₹15,000 की क्षतिपूर्ति का भुगतान 60 दिनों के भीतर करना होगा।