कर्नाटक उच्च न्यायालय ने हेब्बल टनल परियोजना के निर्माण पर रोक लगाने की चेतावनी दी है यदि सरकार झील पर इसके प्रभाव की विस्तृत रिपोर्ट पेश नहीं करती है। अदालत ने सरकार को 10 दिनों का समय दिया है।
मुख्य बातें
- कर्नाटक उच्च न्यायालय ने हेब्बल झील पर टनल के प्रभाव पर स्पष्टीकरण मांगा है।
- सरकार को 10 दिनों के भीतर हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया गया है।
- रिपोर्ट पेश न करने पर परियोजना पर तत्काल रोक (Stay) लगाई जा सकती है।
- याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि टनल से झील का जल स्तर और जल प्रवाह बाधित होगा।
बेंगलुरु: कर्नाटक उच्च न्यायालय ने गुरुवार को हेब्बल फ्लाईओवर जंक्शन से गुजरने वाली प्रस्तावित शॉर्ट टनल परियोजना के निर्माण को रोकने की मांग वाली याचिका पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार अगले सुनवाई तक हेब्बल झील पर इस परियोजना के संभावित प्रभाव और जल प्रवाह पैटर्न पर अपना हलफनामा पेश नहीं करती है, तो परियोजना पर रोक लगा दी जाएगी।
झील और पर्यावरण पर खतरा
143 एकड़ में फैली हेब्बल झील शहर की सबसे बड़ी झीलों में से एक है। अदालत की खंडपीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरु और न्यायमूर्ति के.एस. हेमलेखा शामिल थे, ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि क्या परियोजना के कारण झील के पानी के आने-जाने (inflow/outflow) या भूमिगत जल प्रवाह में कोई बाधा आएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी बुनियादी ढांचे और जल निकायों के बीच संतुलन बनाए रखना भविष्य की आपदाओं को रोकने के लिए अनिवार्य है।
BozokMedia विश्लेषण: विकास बनाम पर्यावरण
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि बेंगलुरु जैसे महानगरों में बुनियादी ढांचे का विकास अक्सर पारिस्थितिक तंत्र की कीमत पर किया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि टनल का निर्माण टैंक बेड (lake bed) के नीचे किया जाएगा, जिससे जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो सकती है।
परियोजना का विवरण
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| परियोजना का नाम | हेब्बल शॉर्ट टनल (अंडरपास) |
| अनुमानित लागत | ₹1,385 करोड़ |
| कुल लंबाई | 2.5 किमी |
| प्रशासनिक निकाय | GBA और BDA |
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
बेंगलुरु में हाल के वर्षों में भारी बारिश के दौरान जलभराव की समस्या गंभीर रही है। 2025 में, कर्नाटक टैंक संरक्षण और विकास प्राधिकरण अधिनियम में संशोधन किया गया था, जिसका उद्देश्य झीलों के बफर जोन की रक्षा करना था। याचिकाकर्ता अब इसी संशोधन की संवैधानिकता को चुनौती दे रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. अदालत ने सरकार को क्या निर्देश दिया है?
अदालत ने सरकार को 10 दिनों के भीतर यह बताने का निर्देश दिया है कि टनल निर्माण से हेब्बल झील के जल प्रवाह पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
2. याचिकाकर्ताओं की मुख्य चिंता क्या है?
याचिकाकर्ताओं को डर है कि टनल निर्माण से झील का प्राकृतिक प्रवाह बाधित होगा और लगभग 890 पेड़ काटे जाएंगे।