केरल उच्च न्यायालय ने सबरीमाला मंदिर के लिए घी की खरीद में हुई अनियमितताओं को देखते हुए विजिलेंस जांच के आदेश दिए हैं। आरोप है कि ई-टेंडर रद्द कर ऊंचे दामों पर घी खरीदा गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है।

मुख्य बिंदु

  • केरल उच्च न्यायालय ने सबरीमाला घी खरीद मामले में विजिलेंस जांच के आदेश दिए हैं।
  • ई-टेंडर प्रक्रिया को रद्द कर ऊंचे दामों पर घी खरीदने का आरोप है।
  • अनुमान है कि उचित बोली स्वीकार करने से ₹2.28 करोड़ की बचत हो सकती थी।
  • ट्रावकोर देवस्वम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष और सदस्य पर जांच का शिकंजा।

केरल उच्च न्यायालय ने सबरीमाला मंदिर के वार्षिक उत्सव सीजन के दौरान घी की खरीद में कथित अनियमितताओं और गबन के मामले में विजिलेंस और भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो (VACB) को जांच के निर्देश दिए हैं। यह मामला मंदिर प्रबंधन में व्याप्त भ्रष्टाचार की तीसरी बड़ी घटना है, जिसकी जांच अब विशेष जांच दल (SIT) द्वारा की जा रही है।

क्या है पूरा मामला?

अदालत को एक रिपोर्ट मिली है जिसमें बताया गया है कि ट्रावकोर देवस्वम बोर्ड (TDB) के पूर्व अध्यक्ष पी.एस. प्रशांत और सदस्य अजिकुमार ने एक चल रही ई-टेंडर प्रक्रिया को रद्द कर दिया। इसके बाद, उन्होंने राज्य की सहकारी डेयरी 'मिल्मा' से बहुत अधिक कीमत पर घी खरीदने का निर्णय लिया। रिपोर्ट के अनुसार, सबसे कम बोली लगाने वाले ने ₹369 प्रति लीटर का भाव दिया था, लेकिन बोर्ड ने ₹510 प्रति लीटर की दर से 1.65 लाख लीटर घी खरीदा।

क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल वित्तीय हेराफेरी का नहीं है, बल्कि यह मंदिर की पवित्रता और प्रबंधन की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। बोर्ड ने दावा किया था कि मिल्मा का घी बेहतर गुणवत्ता का है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय केवल वित्तीय लाभ के लिए लिया गया था।

यह मामला दर्शाता है कि कैसे धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी बड़े पैमाने पर सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का कारण बन सकती है।

जांच में यह भी संदेह जताया गया है कि क्या वास्तव में 1.61 लाख लीटर घी की आपूर्ति की गई थी। खरीद, परिवहन और लेखांकन रिकॉर्ड में भारी विसंगतियां पाई गई हैं। प्रारंभिक जांच के अनुसार, यदि बोर्ड ने सबसे कम बोली स्वीकार की होती, तो लगभग ₹2.28 करोड़ की बचत की जा सकती थी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

सबरीमाला मंदिर पिछले कुछ वर्षों में कई विवादों में रहा है। इससे पहले 'स्वर्ण चोरी' मामले और 'आदिय सिष्टम घी' की बिक्री में हेराफेरी के मामलों की भी SIT जांच चल रही है। यह तीसरी बड़ी घटना है जिसने मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

क्या आप जानते हैं?: सबरीमाला मंदिर में 'अरावना' प्रसाद बनाने के लिए भारी मात्रा में शुद्ध घी का उपयोग किया जाता है, जो मंदिर के राजस्व का एक बड़ा हिस्सा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. कोर्ट ने किन पर जांच के आदेश दिए हैं?
कोर्ट ने TDB के पूर्व अध्यक्ष पी.एस. प्रशांत और सदस्य अजिकुमार के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं।

2. घी की खरीद में कितना नुकसान हुआ?
अनुमान है कि सही टेंडर प्रक्रिया अपनाने से लगभग ₹2.28 करोड़ की बचत हो सकती थी।