महाराष्ट्र के ठाणे में एक सनकी पति ने मामूली विवाद के बाद अपनी पत्नी को जिंदा जला दिया था। 11 साल के लंबे कानूनी संघर्ष के बाद, अदालत ने आरोपी को हत्या का दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।

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  • सुभाष वाघमारे को पत्नी की हत्या के जुर्म में उम्रकैद और 1,000 रुपये जुर्माने की सजा।
  • वारदात 2015 में घोडबंदर गांव में हुई थी, जब पत्नी ने बर्तन धोने के बाद पैर दबाने की बात कही थी।
  • कोर्ट ने पीड़िता के दूसरे मृत्यु पूर्व बयान (Dying Declaration) को आधार मानकर फैसला सुनाया।

महाराष्ट्र के ठाणे जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक पति की क्रूरता की इंतहा तब देखने को मिली जब उसने महज पैर दबाने में हुई देरी के कारण अपनी पत्नी को जिंदा जला दिया। सत्र न्यायालय ने इस मामले में 11 साल बाद अपना फैसला सुनाते हुए 38 वर्षीय सुभाष वाघमारे को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

घटना का विवरण: एक मामूली बात और खौफनाक अंजाम

यह दर्दनाक घटना 9 मई 2015 की है। सुभाष अपनी पत्नी वैशाली के साथ घोडबंदर गांव में एक किराए के मकान में रहता था। गवाहों और सबूतों के अनुसार, उस रात सुभाष ने वैशाली से अपने पैर दबाने की मांग की। वैशाली ने विनम्रतापूर्वक कहा कि वह पहले रसोई के बर्तन साफ कर लेगी, उसके बाद पैर दबाएगी।

इतनी छोटी सी बात पर सुभाष अपना आपा खो बैठा और उसने वैशाली की बेरहमी से पिटाई की। जब वैशाली दर्द से कराहते हुए बिस्तर पर बैठी, तब सुभाष ने घर में रखे मिट्टी के तेल (केरोसिन) को उस पर उड़ेल दिया और माचिस जलाकर उसे आग के हवाले कर दिया। गंभीर रूप से झुलसी वैशाली को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ चार दिनों के संघर्ष के बाद 13 मई 2015 को उसकी मृत्यु हो गई।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह मामला घरेलू हिंसा के प्रति समाज की संवेदनहीनता और न्यायिक प्रक्रिया में लगने वाले लंबे समय को उजागर करता है। अक्सर ऐसे मामलों में आरोपी 'आत्महत्या' का सहारा लेकर बचने की कोशिश करते हैं, लेकिन इस केस में 'मृत्यु पूर्व बयान' की कानूनी अहमियत ने न्याय सुनिश्चित किया।

"घरेलू हिंसा के मामलों में पीड़िता अक्सर डर के कारण शुरुआती बयानों में सच नहीं बोल पाती, जिससे कानूनी जटिलताएं बढ़ जाती हैं।"

न्यायिक मोड़: दो बयानों की जंग

इस मुकदमे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू वैशाली के दो अलग-अलग बयान थे। 10 मई को पहले बयान में उसने कहा था कि उसने पेट और कान के दर्द के कारण खुदकुशी की कोशिश की। बचाव पक्ष ने इसी बयान को आधार बनाकर इसे आत्महत्या साबित करने की कोशिश की। हालांकि, अगले दिन 11 मई को पुलिस और स्पेशल एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के सामने वैशाली ने खुलासा किया कि वह पति के डर से पहले झूठ बोल रही थी।

जज आर. डी. सावंत ने दूसरे बयान को अधिक विश्वसनीय माना और इसे पति के दबाव का परिणाम बताया। अदालत ने खुदकुशी की थ्योरी को सिरे से खारिज कर दिया और आरोपी को हत्या का दोषी करार दिया।

क्या आप जानते हैं? भारतीय कानून के तहत 'मृत्यु पूर्व बयान' (Dying Declaration) को एक अत्यंत शक्तिशाली साक्ष्य माना जाता है, क्योंकि यह माना जाता है कि मरता हुआ व्यक्ति झूठ नहीं बोलता।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: आरोपी को कितनी सजा सुनाई गई है?
अदालत ने आरोपी सुभाष वाघमारे को उम्रकैद की सजा सुनाई है और 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया है।

प्रश्न 2: कोर्ट ने किस बयान को सही माना?
कोर्ट ने पीड़िता के दूसरे बयान को सही माना, जिसमें उसने पति द्वारा जलाए जाने की बात स्वीकार की थी।