बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी है कि MLC बनने के बाद दीपक प्रकाश पंचायती राज मंत्री के रूप में अपना पद जारी रख सकते हैं। यह मामला संविधान के अनुच्छेद 164(4) की व्याख्या से जुड़ा है।

मुख्य बातें

  • बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दीपक प्रकाश अब विधान परिषद (MLC) के सदस्य हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया था कि बिना निर्वाचित हुए छह महीने से अधिक समय तक मंत्री कैसे बने रह सकते हैं।
  • याचिकाकर्ता का तर्क है कि अनुच्छेद 164(4) का दुरुपयोग किया जा रहा है।

नई दिल्ली: बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के मंत्री पद की वैधता को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में एक नया मोड़ आया है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान, बिहार सरकार ने तर्क दिया कि दीपक प्रकाश अब विधान परिषद के सदस्य (MLC) बन चुके हैं, इसलिए उनके मंत्री पद पर बने रहने में कोई कानूनी बाधा नहीं है।

सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष यह दलील दी। अदालत ने राज्य सरकार को अब दीपक प्रकाश के नामांकन की अधिसूचना पेश करने का निर्देश दिया है। यह मामला एक याचिका से उपजा है जिसमें दीपक प्रकाश की दूसरी बार मंत्री नियुक्त होने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है, क्योंकि वे राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला भारतीय संसदीय लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों को छूता है। संविधान का अनुच्छेद 164(4) एक गैर-सदस्य को छह महीने तक मंत्री रहने की अनुमति देता है, बशर्ते वह इस अवधि के भीतर चुनाव जीतकर सदन का सदस्य बन जाए।

यह मामला तय करेगा कि क्या संवैधानिक प्रावधानों का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए बार-बार किया जा सकता है या नहीं।

याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह ने तर्क दिया है कि अनुच्छेद 164(4) एक बार का अवसर है। उन्होंने कहा कि सरकार बदलने पर इस प्रावधान का बार-बार उपयोग करना चुनावी जवाबदेही और प्रतिनिधि लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

दीपक प्रकाश, जो RLM अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र हैं, को पहली बार 20 नवंबर, 2025 को नीतीश कुमार द्वारा मंत्री नियुक्त किया गया था। इसके बाद, सरकार बदलने पर उन्हें दोबारा मंत्री बनाया गया, जिसे अब अदालत में चुनौती दी गई है।

क्या आप जानते हैं?: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 164(4) सुनिश्चित करता है कि कोई भी व्यक्ति जो निर्वाचित नहीं है, वह अधिकतम 6 महीने तक मंत्रिपरिषद का हिस्सा रह सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: अनुच्छेद 164(4) क्या है?
उत्तर: यह प्रावधान किसी भी गैर-विधायक को 6 महीने की अवधि के लिए मंत्री बनने की अनुमति देता है, बशर्ते वह इस दौरान चुनाव जीत ले।

प्रश्न 2: याचिकाकर्ता की मुख्य आपत्ति क्या है?
उत्तर: याचिकाकर्ता का कहना है कि इस प्रावधान का उपयोग बार-बार करके लोकतांत्रिक प्रक्रिया और चुनावी जवाबदेही को दरकिनार किया जा रहा है।