बेंगलुरु के देवनहल्ली में पार्ट-टाइम पैकेजिंग जॉब के नाम पर लोगों से लाखों रुपये ठगने के आरोप में एक दंपत्ति को पुलिस ने हिरासत में लिया है। जालसाजों ने आकर्षक वेतन का लालच देकर लोगों को अपने जाल में फंसाया।

मुख्य बातें

  • देवनहल्ली में पैकेजिंग जॉब के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है।
  • किरण कुमार और आरती नामक दंपत्ति को पुलिस ने हिरासत में लिया है।
  • लगभग 15 लोगों ने लाखों रुपये गंवाने की शिकायत दर्ज कराई है।
  • पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अनियंत्रित जमा योजना प्रतिबंध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।

बेंगलुरु पुलिस ने उत्तर-पूर्व बेंगलुरु के देवनहल्ली इलाके में संदिग्ध पार्ट-टाइम जॉब ऑफर के माध्यम से कई लोगों को ठगने के आरोप में एक दंपत्ति को हिरासत में लिया है। आरोपियों की पहचान किरण कुमार और आरती के रूप में हुई है। पुलिस अब उनके बैंक खातों की जांच कर रही है, क्योंकि लगभग 15 पीड़ितों ने उनके पास पहुंचकर लाखों रुपये ठगे जाने की शिकायत की है।

पुलिस के अनुसार, इस घोटाले को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने सुबह के समाचार पत्रों के साथ पैम्फलेट बांटकर इस योजना का प्रचार किया था। यह योजना 'पैकेजिंग वर्क' के रूप में पेश की गई थी, जिसमें लोगों को 4 महीने या 12 महीने की अवधि का विकल्प दिया जाता था।

धोखाधड़ी का तरीका (Modus Operandi)

आरोपियों ने एक जटिल योजना बनाई थी जिसमें लोगों को भारी जमा राशि (Deposit) देनी पड़ती थी। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति 12 महीने की योजना के तहत प्रति माह 200 किलो पैकेजिंग का काम चुनता था, तो उसे शुरुआत में ₹1 लाख जमा करने पड़ते थे। इसके बदले में, उन्हें हर महीने लगभग ₹23,000 का वेतन देने का वादा किया जाता था। साल के अंत में, निवेश की गई राशि से लगभग दोगुना लाभ होने का दावा किया गया था।

आरोपियों द्वारा पैकेजिंग सामग्री सीधे लोगों के घरों पर भेजी जाती थी, और काम पूरा होने के बाद सामग्री वापस ले ली जाती थी। मामला तब उजागर हुआ जब एक निवेशक को कई महीनों तक उसका वादा किया गया वेतन नहीं मिला।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह के 'वर्क फ्रॉम होम' स्कैम तेजी से बढ़ रहे हैं जो मध्यम वर्ग की आय बढ़ाने की इच्छा का फायदा उठाते हैं। यह मामला दर्शाता है कि कैसे अनियंत्रित जमा योजनाएं (Unregulated Deposit Schemes) मासूम लोगों की मेहनत की कमाई को निशाना बनाती हैं।

'जॉब के नाम पर पहले पैसे मांगना धोखाधड़ी का सबसे बड़ा संकेत है, इससे सतर्क रहना अनिवार्य है।'

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 (धोखाधड़ी) और 316 (आपराधिक विश्वासघात) के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। इसके साथ ही, अनियंत्रित जमा योजना प्रतिबंध अधिनियम, 2019 के तहत भी कार्रवाई की जा रही है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में पिछले कुछ वर्षों में 'पैकेजिंग जॉब स्कैम' के मामलों में भारी वृद्धि देखी गई है, जहाँ जालसाज व्हाट्सएप और समाचार पत्रों के माध्यम से घर बैठे काम करने का लालच देकर लोगों से सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर पैसे वसूलते हैं।

क्या आप जानते हैं?: साइबर अपराधी अक्सर 'वर्क फ्रॉम होम' के नाम पर ऐसे जाल बिछाते हैं जहाँ वे आपको काम तो देते हैं, लेकिन काम शुरू करने के लिए भारी 'रजिस्ट्रेशन फीस' या 'मटेरियल डिपॉजिट' मांगते हैं।

Frequently Asked Questions

1. यह स्कैम कैसे काम करता था?
आरोपी पैकेजिंग का काम देने के नाम पर भारी अग्रिम जमा राशि लेते थे और मासिक वेतन का लालच देते थे।

2. पुलिस ने किन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है?
पुलिस ने BNS की धारा 318, 316 और अनियंत्रित जमा योजना प्रतिबंध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।