कोयंबटूर सिटी पुलिस ने एक महीने तक चले व्यापक अभियान के दौरान नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध बिक्री के आरोप में 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में भारी मात्रा में गांजा, मेथामफेटामाइन और प्रतिबंधित तंबाकू जब्त किया गया है।

मुख्य बातें

  • कोयंबटूर पुलिस ने एक महीने के अभियान में 103 लोगों को ड्रग्स के मामले में गिरफ्तार किया।
  • 125.72 किलोग्राम गांजा और 5.55 ग्राम मेथामफेटामाइन सहित भारी मात्रा में नशीले पदार्थ जब्त।
  • तंबाकू और अवैध शराब की बिक्री के मामले में भी दर्जनों गिरफ्तारियां और भारी मात्रा में माल बरामद।

कोयंबटूर पुलिस ने शहर में नशीले पदार्थों के बढ़ते जाल को तोड़ने के लिए एक महीने तक चलने वाले विशेष 'स्टॉर्मिंग ऑपरेशन' के तहत बड़ी सफलता हासिल की है। 8 जुलाई से 8 अगस्त तक चले इस सघन अभियान के दौरान पुलिस ने नशीले पदार्थों के कब्जे और बिक्री के आरोप में कुल 103 लोगों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, एनडीपीएस (NDPS) अधिनियम के तहत 62 मामले दर्ज किए गए हैं। इस कार्रवाई में पुलिस ने 125.72 किलोग्राम गांजा, 5.55 ग्राम मेथामफेटामाइन, 2,300 से अधिक प्रिस्क्रिप्शन टैबलेट और ₹34,600 नकद बरामद किए हैं। इसके साथ ही तस्करी में इस्तेमाल होने वाले तीन चार पहिया वाहन और 20 दोपहिया वाहन भी जब्त किए गए हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह कार्रवाई?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि शहरी क्षेत्रों में नशीले पदार्थों की सुलभता युवाओं के लिए एक गंभीर खतरा बन रही है। कोयंबटूर पुलिस का यह आक्रामक रुख न केवल अवैध व्यापार को लक्षित करता है, बल्कि स्थानीय समुदायों में कानून के शासन को भी मजबूत करता है।

नशीले पदार्थों के खिलाफ यह जीरो-टॉलरेंस नीति शहर की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक निर्णायक कदम है।

ड्रग्स के अलावा, पुलिस ने तंबाकू और अवैध शराब के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाया है। सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA) के तहत 109 मामले दर्ज किए गए, जिसमें 118 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 1.77 टन प्रतिबंधित तंबाकू जब्त किया गया। इसके अतिरिक्त, अवैध रूप से भारतीय निर्मित विदेशी शराब (IMFL) की बिक्री के लिए 44 मामले दर्ज किए गए और 52 लोगों को हिरासत में लिया गया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

तमिलनाडु के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में से एक होने के नाते, कोयंबटूर लंबे समय से नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए एक संभावित मार्ग रहा है। पुलिस प्रशासन पिछले कुछ वर्षों में नशीले पदार्थों के खिलाफ अपनी रणनीति को अधिक आक्रामक और डेटा-संचालित बना रहा है।

क्या आप जानते हैं?: नशीले पदार्थों के खिलाफ चलाए जाने वाले इन अभियानों को अक्सर 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप' जैसे नामों से जाना जाता है ताकि अपराधियों में भय पैदा किया जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. पुलिस ने कुल कितने ड्रग्स के मामले दर्ज किए?
पुलिस ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत 62 मामले दर्ज किए हैं।

2. क्या इस अभियान में वाहन भी जब्त किए गए?
हाँ, ड्रग्स और तंबाकू के मामलों में कई चार पहिया और दोपहिया वाहन जब्त किए गए हैं।