हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने शिमला में फोर-लेन हाईवे निर्माण के दौरान एक बहुमंजिला इमारत गिरने के मामले में NHAI और ठेकेदार को 2.23 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में लापरवाही के लिए अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।

मुख्य बातें

  • NHAI और मेसर्स गवर शिमला हाईवे प्राइवेट लिमिटेड को 50-50% मुआवजा देना होगा।
  • मुआवजे की कुल राशि 2.23 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।
  • कोर्ट ने पहाड़ी कटाई और पर्यवेक्षण में लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
  • प्रभावित परिवार को चार सप्ताह के भीतर भुगतान करने का आदेश।

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और उनके ठेकेदार को निर्देश दिया कि वे शिमला के बाहरी इलाके में फोर-लेन हाईवे निर्माण के दौरान गिरी एक आवासीय इमारत के लिए समान रूप से मुआवजा साझा करें। यह मामला 2025 के मानसून के दौरान घटित हुआ था, जब पहाड़ी कटाई के कारण एक बहुमंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई थी।

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की पीठ ने यह आदेश चंदा देवी द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए दिया। चंदा देवी ने शिकायत की थी कि पड़ोसी इमारत गिरने के बाद उनका साढ़े तीन मंजिला घर भी असुरक्षित हो गया है। कोर्ट ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि जुलाई पिछले वर्ष मुआवजे का आकलन होने के बावजूद, NHAI या ठेकेदार ने अब तक कोई भुगतान नहीं किया था।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह फैसला उन सरकारी निकायों के लिए एक चेतावनी है जो अक्सर ठेकेदारों पर जिम्मेदारी डालकर खुद को बचाने की कोशिश करते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि NHAI केवल 'हाथ नहीं धो सकता', क्योंकि परियोजना की निगरानी और पहाड़ी कटाई की अनुमति उसकी जिम्मेदारी थी। यह मामला पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी राज्यों में अनियंत्रित निर्माण के खतरों को उजागर करता है।

बुनियादी ढांचे का विकास मानवीय जीवन और निजी संपत्ति की कीमत पर नहीं होना चाहिए; जवाबदेही ही भविष्य की आपदाओं को रोकने का एकमात्र तरीका है।

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि ऐसी बड़ी परियोजनाएं चलाने वाली कंपनियों की हिमाचल प्रदेश के लोगों के प्रति कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) होनी चाहिए। कोर्ट ने राज्य अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे चंदा देवी के घर को हुए नुकसान का भी आकलन करें और निर्धारित सरकारी प्रक्रिया के अनुसार मुआवजा तय करें।

विवरण मूल आकलन (प्रशासन) कोर्ट आदेश (वर्तमान)
कुल मुआवजा राशि ₹5.61 करोड़ ₹2.23 करोड़
जिम्मेदारी का वितरण ठेकेदार पर NHAI (50%) और ठेकेदार (50%)
भुगतान समयसीमा अनिर्धारित 4 सप्ताह
क्या आप जानते हैं?: हिमाचल प्रदेश जैसे नाजुक पहाड़ी क्षेत्रों में 'स्लोप स्टेबलाइजेशन' तकनीक का उपयोग अनिवार्य है, लेकिन अक्सर लागत बचाने के लिए इसे नजरअंदाज किया जाता है, जिससे भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. यह घटना कहाँ और कब हुई थी?
यह घटना 30 जून 2025 को शिमला के भट्टकुफ्फार क्षेत्र की माथु कॉलोनी में हुई थी।

2. कोर्ट ने NHAI की भूमिका पर क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि NHAI निर्माण गतिविधियों के परिणामों से खुद को अलग नहीं कर सकता, विशेषकर जब मामला पहाड़ी कटाई और पर्यवेक्षण का हो।