मंगलुरु उपभोक्ता न्यायालय ने एयर इंडिया एक्सप्रेस को एक यात्री से वसूला गया ₹2,000 का विशेष हैंडलिंग शुल्क वापस करने और हर्जाना देने का आदेश दिया है। यात्री के ₹3 लाख के खेल उपकरण को सामान्य सामान की तरह扱ा गया था।

  • उपभोक्ता न्यायालय ने एयर इंडिया एक्सप्रेस को ₹2,000 का विशेष शुल्क वापस करने का निर्देश दिया।
  • एयरलाइन को मानसिक पीड़ा के लिए ₹20,000 और कानूनी लागत के लिए ₹5,000 का अतिरिक्त हर्जाना देना होगा।
  • यात्री के ₹3 लाख के महंगे खेल उपकरण को सामान्य सामान की तरह बैगेज बेल्ट पर रखा गया था।

मंगलुरु: दक्षिण कन्नड़ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एयर इंडिया एक्सप्रेस के खिलाफ एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए एयरलाइन को सेवा में कमी के लिए दंडित किया है। यह मामला सुल्लिया तालुक के हरिहरपल्लतडका निवासी एन. जी. सुशांत से संबंधित है, जिन्होंने अपनी महंगी खेल सामग्री के लिए विशेष हैंडलिंग शुल्क का भुगतान किया था, लेकिन एयरलाइन ने उस प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया।

क्या था पूरा मामला?

घटना 27 जुलाई, 2025 की है, जब सुशांत चेन्नई से मंगलुरु की यात्रा कर रहे थे। उनके पास ₹3 लाख मूल्य का विशेष खेल उपकरण था। एयरलाइन से विशेष देखभाल सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने ₹2,000 का अतिरिक्त शुल्क भी दिया था। हालांकि, मंगलुरु हवाई अड्डे पर पहुंचने पर उन्होंने देखा कि उनका कीमती उपकरण सामान्य सामान के साथ बैगेज कैरोसेल पर रखा गया था, जो विशेष हैंडलिंग के वादे का सीधा उल्लंघन था।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि विमानन कंपनियां अक्सर अतिरिक्त शुल्क वसूलती हैं, लेकिन परिचालन संबंधी खामियों के कारण वे उन सेवाओं को प्रदान करने में विफल रहती हैं। यह मामला यात्रियों के लिए एक मिसाल है कि कैसे वे सेवाओं में कमी के खिलाफ कानूनी रास्ता अपना सकते हैं।

उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए यह निर्णय महत्वपूर्ण है, जो एयरलाइनों को प्रीमियम सेवाओं के लिए लिए गए शुल्क के प्रति जवाबदेह बनाता है।

जब सुशांत ने हवाई अड्डे पर कर्मचारियों से सवाल किया, तो उन्होंने कथित तौर पर कहा कि उन्हें विशेष उपकरण की बुकिंग के बारे में जानकारी नहीं थी। जब यात्री ने ईमेल के माध्यम से रिफंड मांगा, तो एयरलाइन ने मामले को बिना समाधान के ही बंद कर दिया। इसके बाद, सुशांत ने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

एयरलाइन का बचाव

सुनवाई के दौरान, एयर इंडिया एक्सप्रेस ने तर्क दिया कि विमानन मानदंडों के अनुसार आगमन पर सामान की विशेष स्क्रीनिंग की आवश्यकता नहीं होती है और इसे नियमित बेल्ट प्रणाली के माध्यम से ही दिया जाता है। एयरलाइन ने यह भी दावा किया कि उनके ग्राउंड स्टाफ ने उपकरण को हाथ से हटा दिया था ताकि उसे नुकसान न पहुंचे और कोई क्षति दर्ज नहीं की गई थी।

Did You Know?: भारत में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम यात्रियों को सेवा में कमी के लिए मुआवजे का अधिकार देता है, चाहे वह एयरलाइन हो या होटल।

अदालत का फैसला

अध्यक्ष सोमशेकराप्पा के. हांडिगोल और सदस्य शरादम्मा एच.जी. की पीठ ने एयरलाइन के तर्कों को खारिज करते हुए आदेश दिया कि सेवा में स्पष्ट कमी थी। अदालत ने एयरलाइन को निर्देश दिया कि वह 45 दिनों के भीतर ₹2,000 का रिफंड, ₹20,000 का मुआवजा और ₹5,000 की कानूनी लागत का भुगतान करे।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: उपभोक्ता ने एयरलाइन से क्या मांगा था?
उत्तर: उपभोक्ता ने विशेष हैंडलिंग शुल्क की वापसी और सेवा में कमी के कारण मानसिक पीड़ा के लिए मुआवजे की मांग की थी।

प्रश्न 2: क्या एयरलाइन ने कोई नुकसान होने की बात स्वीकार की?
उत्तर: नहीं, एयरलाइन ने दावा किया कि उपकरण को कोई भौतिक नुकसान नहीं पहुंचा था, लेकिन कोर्ट ने सेवा की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित किया।