हैदराबाद उपभोक्ता आयोग ने आदित्य बिड़ला हेल्थ इंश्योरेंस को एक वरिष्ठ नागरिक का दावा खारिज करने और पॉलिसी रद्द करने के लिए दोषी पाया है। आयोग ने कंपनी को इलाज का खर्च वापस करने और पॉलिसी तुरंत बहाल करने का निर्देश दिया है।
मुख्य बातें
- आदित्य बिड़ला हेल्थ इंश्योरेंस को ₹93,000 का दावा और ₹15,000 का मुआवजा देने का आदेश।
- बीमा कंपनी को वरिष्ठ नागरिक की रद्द की गई स्वास्थ्य पॉलिसी तुरंत बहाल करनी होगी।
- अदालत ने पाया कि कंपनी के पास दावे को खारिज करने के लिए कोई दस्तावेजी सबूत नहीं थे।
हैदराबाद के एक उपभोक्ता आयोग ने बीमा क्षेत्र में 'सेवा की कमी' का एक बड़ा मामला उजागर किया है। एक 67 वर्षीय व्यक्ति, जिन्होंने 2018 में अपनी और अपनी पत्नी की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी, को तब झटका लगा जब कंपनी ने उनके अस्पताल भर्ती होने के दावे को 'हाइपरटेंशन' (उच्च रक्तचाप) की जानकारी छिपाने का आरोप लगाकर खारिज कर दिया और उनकी पॉलिसी रद्द कर दी।
मामले की सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष वक्कंती नरसिम्हा राव और सदस्य पी वी टी आर जवाहर बाबू ने पाया कि पॉलिसी पांच साल से अधिक समय से प्रभावी थी और प्रीमियम का नियमित भुगतान किया जा रहा था। आयोग ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि बीमा कंपनी के शाखा प्रबंधकों ने दावे को खारिज करने के समर्थन में एक भी कागज़ पेश नहीं किया।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है (BozokMedia विश्लेषण)
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि बीमा कंपनियां अक्सर 'गैर-प्रकटीकरण' (non-disclosure) का सहारा लेकर दावों से बचने की कोशिश करती हैं। यह फैसला एक मिसाल है कि यदि पॉलिसी का 'कूलिंग-ऑफ पीरियड' समाप्त हो चुका है और पॉलिसी वर्षों से चल रही है, तो बीमा कंपनियां बिना ठोस सबूतों के मनमाने ढंग से पॉलिसी रद्द नहीं कर सकतीं। यह उपभोक्ताओं को सशक्त बनाता है और कॉर्पोरेट जवाबदेही तय करता है।
"बीमा कंपनियां केवल मौखिक आरोपों के आधार पर दावों को खारिज नहीं कर सकतीं; उन्हें साबित करना होगा कि पॉलिसीधारक ने जानबूझकर महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई थी, खासकर जब पॉलिसी वर्षों से सक्रिय हो।"
उपभोक्ता ने स्पष्ट किया था कि उन्होंने प्री-पॉलिसी मेडिकल चेक-अप के दौरान अपनी स्वास्थ्य स्थिति का खुलासा किया था। दिसंबर 2023 में सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिस पर ₹93,000 का खर्च आया। कंपनी ने दावा किया कि व्यक्ति 2017 से इस बीमारी से पीड़ित था, लेकिन इसके लिए कोई दस्तावेजी प्रमाण नहीं दिया गया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्या बीमा कंपनियां पहले से मौजूद बीमारियों (Pre-existing diseases) के आधार पर दावा खारिज कर सकती हैं?
हाँ, लेकिन केवल तब तक जब तक कि पॉलिसी में निर्धारित 'वेटिंग पीरियड' या 'कूलिंग-ऑफ पीरियड' समाप्त न हो गया हो।
2. यदि बीमा कंपनी मेरा दावा गलत तरीके से खारिज कर दे तो मुझे क्या करना चाहिए?
आप बीमा लोकपाल (Ombudsman) या उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।