CBI की चार्जशीट ने ट्विशा शर्मा की मौत के पीछे मानसिक क्रूरता, प्रेग्नेंसी को लेकर विवाद और 20 लाख रुपये के निवेश पर दबाव की एक दर्दनाक कहानी उजागर की है।

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  • CBI का आरोप है कि पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह ने ट्विशा को व्यवस्थित रूप से प्रताड़ित किया।
  • ट्विशा के DEMAT अकाउंट में मौजूद 20 लाख रुपये को संयुक्त खाते में ट्रांसफर करने का दबाव बनाया गया।
  • गर्भपात (MTP) और प्रेग्नेंसी को लेकर ससुराल पक्ष के साथ गंभीर विवाद और मानसिक तनाव।
  • चार्जशीट में नशीले पदार्थों (Marijuana) के सेवन और आक्रामक व्यवहार का भी जिक्र है।

भोपाल के ट्विशा शर्मा डेथ केस में CBI द्वारा दाखिल चार्जशीट ने एक ऐसे वैवाहिक जीवन की तस्वीर पेश की है, जो केवल तनाव और नियंत्रण से भरा था। जांच एजेंसी के अनुसार, ट्विशा को उसके पति समर्थ सिंह द्वारा लगातार मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा, जिसमें उसकी सास गिरिबाला सिंह ने न केवल उकसाया बल्कि ट्विशा की शिकायतों को पूरी तरह नजरअंदाज किया।

CBI की जांच के मुताबिक, अप्रैल 2026 में ट्विशा की प्रेग्नेंसी की पुष्टि होने के बाद विवाद और बढ़ गया। वैवाहिक तनाव और दुर्व्यवहार के कारण ट्विशा इस बात को लेकर असमंजस में थी कि वह गर्भावस्था जारी रखे या नहीं। इसी मुद्दे पर पति के साथ हुए विवाद के बाद वह अपने मायके नसीराबाद चली गई थी, जहाँ उसने अपने माता-पिता को ससुराल की घुटन के बारे में बताया।

वित्तीय लालच और पेशेवर अपमान

चार्जशीट का एक सबसे गंभीर पहलू वित्तीय दबाव है। ट्विशा के DEMAT अकाउंट में लगभग 20 लाख रुपये के इक्विटी निवेश थे। CBI का दावा है कि आरोपी समर्थ और गिरिबाला ने इस रकम को संयुक्त खाते में ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाया, जिसे ट्विशा ने यह कहकर खारिज कर दिया कि यह पैसा उसके पिता का है। इसके अलावा, नौकरी जाने के बाद समर्थ द्वारा उसकी अंग्रेजी और करियर को लेकर ताने दिए जाते थे, जिससे उसका आत्मविश्वास टूट गया था।

"यह मामला 'कोर्सिव कंट्रोल' का एक स्पष्ट उदाहरण है, जहाँ वित्तीय निर्भरता और मनोवैज्ञानिक अलगाव का उपयोग व्यक्ति को मानसिक रूप से तोड़ने के लिए किया जाता है।"

त्रासदी की ओर बढ़ते कदम

ट्विशा ने अपनी जिंदगी को पटरी पर लाने की कोशिश की और DADB German Academy of Digital Education से नौकरी का ऑफर भी स्वीकार किया। लेकिन ससुराल में उसकी हर हरकत पर निगरानी रखी जा रही थी। वह एंग्जायटी और तनाव के कारण मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी के पास गई और MTP (गर्भपात) की दवाएं लीं। CBI के अनुसार, जब उसने गर्भपात का निर्णय लिया, तो परिवार ने उस पर इसे जारी रखने का दबाव बनाया, जिससे वह भावनात्मक रूप से पूरी तरह टूट गई।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल घरेलू विवाद नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि कैसे वित्तीय शोषण और प्रजनन अधिकारों (Reproductive Rights) का हनन एक व्यक्ति को आत्महत्या की कगार पर धकेल सकता है। कपल काउंसलिंग के दौरान Marijuana के सेवन की बात सामने आना यह दर्शाता है कि घर का माहौल अत्यधिक अस्थिर और हिंसक था।

बिंदु ट्विशा का पक्ष/कार्य आरोपियों का कथित व्यवहार
पैसा 20 लाख निवेश देने से इनकार संयुक्त खाते में ट्रांसफर का दबाव
प्रेग्नेंसी मानसिक तनाव के कारण MTP चाहा प्रेग्नेंसी जारी रखने का दबाव बनाया
करियर नोएडा/दिल्ली में नौकरी की तलाश अंग्रेजी और नौकरी जाने पर ताने दिए

12 मई की रात CCTV फुटेज में ट्विशा अकेले छत पर जाती दिखी। उसने अपने पिता और मां को फोन कर रोते हुए मदद मांगी। इसके बाद समर्थ और गिरिबाला छत पर गए और ट्विशा को नीचे लाया गया। रात 10:55 बजे AIIMS भोपाल में उसे मृत घोषित कर दिया गया। हालांकि शुरुआती रिपोर्ट में फांसी बताया गया, लेकिन CBI की चार्जशीट इस मौत के पीछे के गहरे मानसिक उत्पीड़न को उजागर करती है।

क्या आप जानते हैं?: दुनिया के कई देशों में 'कोर्सिव कंट्रोल' (मानसिक और भावनात्मक नियंत्रण) को अब शारीरिक हिंसा की तरह ही एक गंभीर अपराध माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: CBI के अनुसार विवाद का मुख्य कारण क्या था?
मुख्य विवाद मानसिक प्रताड़ना, 20 लाख रुपये के निवेश को हड़पने का प्रयास और प्रेग्नेंसी को लेकर ससुराल पक्ष का दबाव था।

प्रश्न 2: क्या ट्विशा ने अपनी मौत से पहले मदद मांगी थी?
हाँ, उसने अपनी माँ, भाई और पूर्व नियोक्ता अमित दास को अपनी स्थिति के बारे में बताया था और मौत से ठीक पहले अपने माता-पिता को फोन कर मदद मांगी थी।