हैदराबाद की लैंगर हाउस पुलिस ने 'ध्यान भटकाने' (Attention-diversion) वाली चोरी करने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में सोना और नकदी बरामद की है।
- लैंगर हाउस, हैदराबाद में संगठित चोरी गिरोह के छह सदस्य गिरफ्तार।
- 13.5 तोला सोने के आभूषण और ₹7.4 लाख नकद बरामद।
- गिरोह ने एक सेवानिवृत्त बैंक प्रबंधक को अपना निशाना बनाया था।
- गिरफ्तार आरोपियों में से चार पहले से ही पुलिस रिकॉर्ड (Rowdy Sheeters) में दर्ज थे।
शहरी अपराध के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई में, लैंगर हाउस पुलिस ने 'अटेंशन-डायवर्जन' (ध्यान भटकाकर चोरी करना) में माहिर एक संगठित आपराधिक गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने 13.5 तोला सोने के गहने, ₹7.4 लाख नकद और दो वाहन बरामद किए हैं, जो हैदराबाद पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता है।
इस मामले की शुरुआत 1 अगस्त को हुई, जब कर्नाटक के बीदर जिले के हुमनाबाद निवासी और एसबीआई (SBI) के सेवानिवृत्त बैंक प्रबंधक डामा मोहन (71 वर्ष) ने शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित के साथ यह घटना लैंगर हाउस स्थित एक रेस्टोरेंट के पास हुई, जहाँ गिरोह ने उन्हें भ्रमित कर बड़ी चतुराई से उनके कीमती सामान चोरी कर लिए।
चोरी किए गए सामान में सात तोले की चार सोने की चूड़ियाँ, तीन तोले की तीन सोने की चेन, 1.2 तोले का एक सोने का लॉकेट और 2.3 तोले की तीन सोने की अंगूठियाँ शामिल थीं। कुल मिलाकर 13.5 तोला सोना चोरी हुआ था, जो गिरोह की योजनाबद्ध तरीके से वार करने की क्षमता को दर्शाता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि शहरी क्षेत्रों में 'ध्यान भटकाने' वाले अपराधों में वृद्धि हो रही है, जो शारीरिक बल के बजाय मनोवैज्ञानिक हेरफेर का उपयोग करते हैं। रेस्टोरेंट और बाजारों जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों को चुनकर, ये गिरोह पीड़ितों की मानसिक स्थिति का फायदा उठाते हैं। आरोपियों में ऑटो ड्राइवरों और सब्जी विक्रेताओं का होना यह संकेत देता है कि वे शहर में अपनी पहचान छिपाकर निगरानी रखने के लिए इन व्यवसायों का उपयोग करते हैं।
सब्जी बेचने और ऑटो चलाने जैसे कम प्रोफाइल वाले व्यवसायों का उपयोग इन गिरोहों को शहर की भीड़ में घुलने-मिलने में मदद करता है, जिससे वे वारदात करने तक अदृश्य रहते हैं।
पुलिस ने 16 अगस्त की आधी रात को तोलिचोकी के पास शाह घौस से आरोपियों को ट्रैक कर गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान सैयद असद (46), ओमर खान (27), सैयद मोइन (34), अजर हुसैन (24), मोहम्मद इब्राहिम (30) और सैयद अब्दुल मजीद (35) के रूप में हुई है।
जांच के दौरान पता चला कि इस गिरोह के सदस्य पेशेवर अपराधी हैं। सैयद असद, मोहम्मद इब्राहिम और सैयद अब्दुल मजीद के खिलाफ चंद्रयानगुट्टा और चारमीनार पुलिस स्टेशनों में 'राउडी शीट' दर्ज थी, जबकि अजर हुसैन संतोषनगर पुलिस स्टेशन का हिस्ट्रीशीटर था।
सोने और नकदी के अलावा, पुलिस ने एक ऑटो-रिक्शा (TG 11 T 5919), एक मोटरसाइकिल (AP 11 AD 3426) और छह मोबाइल फोन जब्त किए हैं, जिनका उपयोग गिरोह आपसी समन्वय के लिए करता था।
बरामद संपत्ति का विवरण
| सामान | मात्रा/वजन | विवरण |
|---|---|---|
| सोने की चूड़ियाँ | 4 नग | 7 तोला |
| सोने की चेन | 3 नग | 3 तोला |
| लॉकेट/अंगूठियाँ | 4 नग | 3.5 तोला |
| नकदी | - | ₹7.4 लाख |
| वाहन | 2 यूनिट | ऑटो और मोटरसाइकिल |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: अटेंशन-डायवर्जन चोरी क्या है?
यह चोरी का एक तरीका है जिसमें अपराधी पीड़ित का ध्यान किसी बात से भटकाता है ताकि वह बिना पता चले कीमती सामान चुरा सके।
प्रश्न 2: आरोपियों को कहाँ से गिरफ्तार किया गया?
आरोपियों को हैदराबाद के तोलिचौकी स्थित शाह घौस इलाके से गिरफ्तार किया गया।