कर्नाटक उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से अल्प-वैधता वाले पासपोर्टों (Short-Validity Passports) की अवधि बढ़ाने पर विचार करने को कहा है, ताकि विदेश वीजा आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।

  • कर्नाटक उच्च न्यायालय ने केंद्र से अल्प-वैधता पासपोर्ट की समय सीमा बढ़ाने का आग्रह किया।
  • वर्तमान में ऐसे पासपोर्ट केवल एक वर्ष के लिए जारी किए जाते हैं, जबकि कई देशों को 6 महीने की न्यूनतम वैधता चाहिए।
  • अदालत ने यात्रा के अधिकार को अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा माना है।

बेंगलुरु स्थित कर्नाटक उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा है कि वह उन नागरिकों के लिए जारी किए जाने वाले अल्प-वैधता पासपोर्टों (Short-Validity Passports) की अवधि बढ़ाने पर गंभीरता से विचार करे, जिनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। जस्टिस सूरज गोविंदराज ने पाया कि वर्तमान में केवल एक वर्ष की वैधता वाले पासपोर्ट जारी किए जा रहे हैं, जिससे नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय यात्रा और वीजा प्रक्रियाओं में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

अदालत ने इस बात पर विशेष ध्यान दिया कि अधिकांश विदेशी दूतावास और देश वीजा जारी करने के लिए पासपोर्ट में कम से कम छह महीने की शेष वैधता की मांग करते हैं। ऐसे में, एक वर्ष का पासपोर्ट बहुत जल्द अपनी उपयोगिता खो देता है, जिससे बार-बार नवीनीकरण (Renewal) की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जो न केवल समय लेने वाला है बल्कि मानसिक तनाव का कारण भी बनता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का नहीं है, बल्कि मौलिक अधिकारों का है। जब कोई न्यायालय किसी आरोपी को विदेश जाने की अनुमति देता है, तो पासपोर्ट की कम अवधि उस न्यायिक अनुमति के वास्तविक लाभ को सीमित कर देती है। यह प्रशासनिक बाधा न्यायपालिका द्वारा दी गई राहत को प्रभावी ढंग से निष्प्रभावी कर देती है।

"यात्रा करने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है और इसे केवल पासपोर्ट जारी न करने के आधार पर बाधित नहीं किया जा सकता।"

यह मामला 53 वर्षीय अजीत रंका की याचिका से जुड़ा है, जिन पर दहेज उत्पीड़न और अन्य आपराधिक धाराएं लगी हुई हैं। रंका ने अपने पासपोर्ट के नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था, जिसे अधिकारियों ने अस्वीकार कर दिया था। उच्च न्यायालय ने उनकी याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि वे संबंधित अदालत से यात्रा अनुमति प्राप्त कर नोटिस का जवाब दें।

सुनवाई के दौरान, वकील धीरज ए.के. ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों का हवाला दिया। 'महेश कुमार अग्रवाल बनाम भारत संघ (2025)' और 'मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978)' के मामलों का उल्लेख करते हुए यह तर्क दिया गया कि अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता में विदेश यात्रा करने और पासपोर्ट रखने का अधिकार शामिल है।

ऐतिहासिक रूप से, भारत में पासपोर्ट अधिनियम के तहत आपराधिक मामलों में फंसे व्यक्तियों के लिए सख्त नियम रहे हैं। हालांकि, हाल के वर्षों में न्यायपालिका ने यह स्पष्ट किया है कि जब तक किसी व्यक्ति को दोषी सिद्ध नहीं कर दिया जाता, तब तक उसकी बुनियादी स्वतंत्रता को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता, बशर्ते वह अदालत की शर्तों का पालन करे।

क्या आप जानते हैं?: भारतीय पासपोर्ट अधिनियम के तहत, यदि कोई व्यक्ति आपराधिक मुकदमे का सामना कर रहा है, तो पासपोर्ट अधिकारी उसकी पासपोर्ट अवधि को सीमित करने का अधिकार रखते हैं, लेकिन इसके लिए न्यायालय की अनुमति अनिवार्य होती है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: अल्प-वैधता पासपोर्ट (SVP) क्या होता है?
यह वह पासपोर्ट है जो उन व्यक्तियों को जारी किया जाता है जिनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं, लेकिन अदालत ने उन्हें विदेश यात्रा की अनुमति दी है। इसकी अवधि सामान्य पासपोर्ट से बहुत कम होती है।

p>प्रश्न 2: अदालत ने केंद्र सरकार से क्या करने को कहा है?
अदालत ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह विदेशी वीजा आवश्यकताओं (न्यूनतम 6 महीने वैधता) को देखते हुए इन पासपोर्टों की अवधि बढ़ाने के लिए एक नई नीति बनाए।