हैदराबाद पुलिस ने एक बड़े ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए 12 किलोग्राम हैशिश तेल जब्त किया है। इस मामले में एक महिला और दो नाबालिगों सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
- 12 किलोग्राम हैशिश तेल जब्त, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 1.5 करोड़ रुपये है।
- आंध्र प्रदेश से बेंगलुरु जा रही खेप को हैदराबाद के चिनतालकुंटा में पकड़ा गया।
- गिरफ्तार आरोपियों में एक महिला और दो नाबालिग (CCL) शामिल हैं।
- तस्करों ने शरीर के अंगों पर टेप लगाकर ड्रग्स छिपाने का अनोखा तरीका अपनाया था।
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में पुलिस ने नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। एल.बी. नगर जोन की स्पेशल ऑपरेशंस टीम (SOT) और वनस्थलीपुरम पुलिस ने एक संयुक्त अभियान चलाकर छह व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके पास से 12 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाला हैशिश तेल बरामद किया है, जिसकी अनुमानित कीमत 1.5 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
पुलिस के अनुसार, यह खेप आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले से बेंगलुरु ले जाई जा रही थी। खुफिया जानकारी के आधार पर, पुलिस ने वनस्थलीपुरम के चिनतालकुंटा इलाके के पास संदिग्धों को घेरा। तलाशी के दौरान पुलिस तब हैरान रह गई जब उन्हें पता चला कि तस्करों ने ड्रग्स को छिपाने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया था।
पकड़े गए चार वाहकों (carriers), जिनमें दो नाबालिग भी शामिल हैं, ने 1-1 किलोग्राम के पैकेट अपने पैरों और पेट पर भूरे रंग के एडहेसिव टेप से मजबूती से बांध रखे थे। प्रत्येक वाहक के पास तीन पैकेट थे—दो पैरों पर और एक पेट पर। पुलिस ने ड्रग्स के अलावा पांच मोबाइल फोन और 5,000 रुपये नकद भी जब्त किए हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि ड्रग तस्कर अब पारंपरिक छिपाने के तरीकों को छोड़कर मानव शरीर का उपयोग 'कूरियर' के रूप में कर रहे हैं, ताकि सुरक्षा जांच से बचा जा सके। विशेष रूप से गरीब आदिवासी युवाओं को लालच देकर इस खतरनाक खेल में धकेलना एक गंभीर सामाजिक समस्या की ओर इशारा करता है।
"नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए नाबालिगों और महिलाओं का उपयोग करना यह दर्शाता है कि सिंडिकेट अब कानून की कमियों और मानवीय संवेदनाओं का फायदा उठा रहे हैं।"
गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपियों की पहचान 25 वर्षीय जेममेली श्रीनु और उसकी पत्नी निबिया के.बी. के रूप में हुई है। पुलिस जांच में सामने आया है कि श्रीनु पहले भी आंध्र प्रदेश के नरसिपट्टनम और अडवी अन्नावराम पुलिस स्टेशनों में NDPS मामलों में गिरफ्तार हो चुका है। जेल से छूटने के बाद उसने फिर से तस्करी शुरू की।
पुलिस कमिश्नर बी. सुमति ने बताया कि श्रीनु और उसकी पत्नी ने पड़ोसी गांवों के बेरोजगार आदिवासी युवाओं को पैसों का लालच देकर भर्ती किया था। इस विशेष खेप की डिलीवरी के लिए बेंगलुरु निवासी सिजो ने श्रीनु को 10 लाख रुपये का वादा किया था। वर्तमान में मुख्य सप्लायर 'कृष्णा' और रिसीवर 'सिजो' फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
Frequently Asked Questions
1. पकड़े गए आरोपियों ने ड्रग्स को शरीर पर कैसे छिपाया था?
आरोपियों ने 1 किलो के पैकेटों को अपने दोनों पैरों और पेट पर भूरे रंग के मजबूत टेप से बांध रखा था।
2. इस तस्करी नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य क्या था?
यह नेटवर्क आंध्र प्रदेश के चिनतापल्ली क्षेत्र से ड्रग्स इकट्ठा कर उन्हें बेंगलुरु के बाजार में खपाने का काम कर रहा था।