सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि फसलों के नुकसान के डर से राज्य हाथी गलियारों (कॉरिडोर) को बाधित नहीं कर सकते। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार को देश भर में हाथी गलियारों का नया सर्वेक्षण करने और बाधाओं को रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फसलों के नुकसान के डर से हाथियों के प्राकृतिक रास्तों को बाधित नहीं किया जा सकता।
  • मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने केंद्र सरकार को छह सप्ताह के भीतर देश भर के हाथी गलियारों का नया सर्वेक्षण करने का आदेश दिया।
  • ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों द्वारा दीवारें बनाने और पश्चिम बंगाल में 'हुल्ला पार्टियों' द्वारा हाथियों को डराने की प्रथा की आलोचना की गई।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया है कि राज्य सरकारें फसलों के नुकसान या स्थानीय कृषि चिंताओं का हवाला देकर हाथियों के पारंपरिक प्रवासन मार्गों (कॉरिडोर) को अवरुद्ध नहीं कर सकती हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहाना की तीन सदस्यीय पीठ ने वन्यजीवों के निर्बाध संचलन के अधिकार को सर्वोपरि माना है। अदालत ने केंद्र सरकार को देश भर में इन गलियारों की वर्तमान स्थिति का आकलन करने के लिए एक नया और व्यापक सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया है।

सुनवाई के दौरान, पीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वन्यजीवों के मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हाथियों के झुंड सदियों से लंबी दूरी तय करने के आदी रहे हैं और यह उनकी प्राकृतिक जीवन शैली का हिस्सा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कोई भी राज्य यह तर्क नहीं दे सकता कि फसलों के नुकसान के कारण इन गलियारों में रुकावटें पैदा की जानी चाहिए।

Why This Matters

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह निर्णय भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है, लेकिन न्यायपालिका का यह रुख स्पष्ट करता है कि पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा और वन्यजीवों के अधिकारों से समझौता नहीं किया जा सकता। राज्यों द्वारा सीमाओं पर भौतिक बाधाएं खड़ी करने से संघर्ष समाप्त नहीं होता, बल्कि हाथियों का गुस्सा और बढ़ जाता है, जिससे अधिक नुकसान होता है।

राज्य / क्षेत्रबाधा उत्पन्न करने का तरीकापारिस्थितिक प्रभाव
पश्चिम बंगालजलती हुई मशालें, आग के गोले और आक्रामक 'हुल्ला पार्टियां'हाथियों को गंभीर शारीरिक आघात, मानव-पशु संघर्ष में वृद्धि
ओडिशा और छत्तीसगढ़प्रवासन मार्गों पर कंक्रीट की दीवारों का निर्माणपारंपरिक गलियारों का पूर्ण अवरोध, जबरन मार्ग परिवर्तन

अदालत में याचिकाकर्ता के वकील ने उन हिंसक तरीकों पर भी प्रकाश डाला जो हाथियों को भगाने के लिए अपनाए जाते हैं। पश्चिम बंगाल और अन्य पूर्वी राज्यों में हाथियों को डराने के लिए 'हुल्ला पार्टियों' का गठन किया जाता है, जो जलती हुई मशालों और आग के गोलों का उपयोग करती हैं। न्यायमूर्ति बागची ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि नेपाल और उत्तरी बंगाल से होकर ओडिशा और छत्तीसगढ़ जाने वाले हाथियों के पारंपरिक मार्ग पर राज्यों ने दीवारें खड़ी कर दी हैं, जो उनके प्राकृतिक प्रवासन को पूरी तरह से रोकती हैं।

वन्यजीव गलियारे कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं हैं; वे आनुवंशिक विविधता बनाए रखने और विनाशकारी मानव-पशु संघर्षों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण विकासवादी जीवन रेखाएं हैं।

केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को आश्वासन दिया कि हालांकि 2023 में एक निरीक्षण किया गया था, लेकिन सरकार अदालत के निर्देशानुसार एक नया सर्वेक्षण करने और स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए तैयार है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद तय की है और सभी राज्यों को पर्यावरण मंत्रालय के दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करने की चेतावनी दी है।

क्या आप जानते हैं?: एक वयस्क हाथी को प्रतिदिन 150 किलोग्राम तक भोजन की आवश्यकता होती है, जिसके कारण उन्हें पर्याप्त वनस्पति खोजने के लिए सालाना हजारों किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: हाथी कॉरिडोर क्या हैं और ये क्यों महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर: हाथी कॉरिडोर भूमि की संकीर्ण पट्टियाँ हैं जो हाथियों को दो बड़े जंगलों या आवासों के बीच सुरक्षित रूप से यात्रा करने की अनुमति देती हैं। ये हाथियों के अस्तित्व और उनकी आनुवंशिक विविधता को बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं।

प्रश्न 2: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को क्या निर्देश दिए हैं?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को देश भर के सभी हाथी गलियारों का एक नया सर्वेक्षण करने और राज्यों द्वारा किए जा रहे उल्लंघनों तथा बाधाओं को दूर करने के कदमों पर एक व्यापक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।