महाराष्ट्र के पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस ने राजस्थान के बूंदी जिले से एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है, जिसने ₹2.14 करोड़ के डिजिटल अरेस्ट स्कैम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। एक छोटे से बैंक की CCTV फुटेज ने इस बड़े साइबर अपराध का पर्दाफाश करने में मदद की।
- ₹2.14 करोड़ की डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी में राजस्थान के बूंदी से एक आरोपी गिरफ्तार।
- अपराधी ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर बुजुर्ग दंपत्ति को डराया और पैसे ऐंठे।
- बैंक की CCTV फुटेज और मनी ट्रेल के जरिए पुलिस ने आरोपी की पहचान की।
- पैसे को क्रिप्टोकरेंसी और हवाला नेटवर्क के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भेजा गया था।
महाराष्ट्र के पिंपरी-चिंचवड़ साइबर अपराध पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए राजस्थान के बूंदी जिले से 32 वर्षीय राजेंद्र गणराज नागर को गिरफ्तार किया है। नागर एक निर्माण सामग्री आपूर्तिकर्ता है, जो पिछले नौ महीनों से चल रहे ₹2.14 करोड़ के जटिल 'डिजिटल अरेस्ट' घोटाले में शामिल पाया गया है। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने राजस्थान के एक शांत से दिखने वाले कस्बे में एक बैंक के CCTV फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया।
यह मामला पिछले साल नवंबर में शुरू हुआ था, जब एक 74 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रबंधक और उनकी पत्नी (एक सेवानिवृत्त शिक्षिका) को डिजिटल अरेस्ट का शिकार बनाया गया। जालसाजों ने खुद को नासिक पुलिस के अधिकारी बताकर दंपत्ति को डराया कि उनकी पत्नी के नाम पर PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) से जुड़े होने के कारण गिरफ्तारी हो सकती है। डर के मारे, दंपत्ति ने अपने जीवन भर की जमा पूंजी, जिसमें LIC पॉलिसियां और सावधि जमा (FD) शामिल थीं, 'सरकारी खातों' में स्थानांतरित कर दीं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि डिजिटल अरेस्ट स्कैम अब केवल स्थानीय नहीं रह गए हैं, बल्कि इनका नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ है। अपराधी 'म्यूल अकाउंट्स' (Mule Accounts) का उपयोग करते हैं ताकि जांच का रास्ता भटकाया जा सके। यह मामला दिखाता है कि कैसे एक छोटी सी डिजिटल पदचिह्न (Digital Footprint) जैसे कि बैंक का CCTV, करोड़ों के अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क को ध्वस्त करने में मदद कर सकता है।
साइबर अपराधी अब मनोवैज्ञानिक दबाव और फर्जी सरकारी पहचान का उपयोग करके मध्यम आयु वर्ग के लोगों को निशाना बना रहे हैं, जिससे बचना और भी कठिन हो गया है।
जांच में पाया गया कि चोरी किए गए पैसे को दो अलग-अलग परतों (layers) वाले बैंक खातों के माध्यम से घुमाया गया था। सुल्तान कंस्ट्रक्शन मटेरियल सप्लायर नामक एक खाते में ₹49 लाख प्राप्त हुए, जिसे बाद में दूसरे खाते में स्थानांतरित कर दिया गया। पुलिस ने पाया कि आरोपी नागर न केवल इन खातों का संचालन कर रहा था, बल्कि नकदी भी निकाल रहा था जिसे बाद में क्रिप्टोकरेंसी या हवाला के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय मास्टरमाइंड्स तक पहुँचाया जाता था।
पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस आयुक्त विनय कुमार चौबे के नेतृत्व में की गई इस जांच में पाया गया कि आरोपी 'राजा' नामक एक अन्य संदिग्ध के संपर्क में था, जो धन को आगे भेजने का काम करता था। पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शनों की तलाश कर रही है।
Frequently Asked Questions
1. डिजिटल अरेस्ट स्कैम से कैसे बचें?
याद रखें कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के माध्यम से गिरफ्तारी नहीं करती और न ही पैसे ट्रांसफर करने को कहती है। किसी भी संदिग्ध कॉल पर तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित करें।
2. क्या पुलिस साइबर अपराध की जांच कर सकती है?
हाँ, यदि आप धोखाधड़ी का शिकार होते हैं, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज करें।