केरल उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि वैवाहिक विवादों में बदला लेने के लिए POCSO कानून का दुरुपयोग किया जा रहा है। अदालत ने एक व्यक्ति की सजा को रद्द करते हुए साक्ष्यों में गंभीर विसंगतियों को उजागर किया है।

  • केरल उच्च न्यायालय ने वैवाहिक विवादों में POCSO कानून के दुरुपयोग पर चिंता जताई।
  • अदालत ने एक सौतेले पिता की 40 साल की सजा को साक्ष्यों के अभाव में रद्द कर दिया।
  • न्यायालय ने कहा कि पारिवारिक कलह के मामलों में झूठे आरोप लगाए जाने की संभावना अधिक होती है।

केरल उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक अत्यंत संवेदनशील टिप्पणी करते हुए कहा है कि POCSO अधिनियम का उपयोग अक्सर वैवाहिक विवादों में आपसी रंजिश निकालने और व्यक्तिगत स्कोर सेट करने के लिए किया जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका को ऐसे दावों की गहन जांच करनी चाहिए, विशेष रूप से जब वे पारिवारिक कलह के बीच उभरते हैं।

सजा रद्द करने का आधार

न्यायमूर्ति ए बधरुद्दीन की अध्यक्षता में सुनवाई करते हुए, अदालत ने एक व्यक्ति की सजा को खारिज कर दिया जिसे उसके सौतेले बच्चे के कथित यौन शोषण के लिए दोषी ठहराया गया था। निचली अदालत ने आरोपी को 40 साल के कठोर कारावास और भारी जुर्माने की सजा सुनाई थी। हालांकि, उच्च न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्य संदेह से परे नहीं थे।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि कानून का उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा करना है, लेकिन जब इसका उपयोग हथियार के रूप में किया जाता है, तो यह निर्दोषों के जीवन को बर्बाद कर सकता है। यह मामला कानूनी प्रक्रिया में साक्ष्यों की विश्वसनीयता और 'संदेह का लाभ' (Benefit of Doubt) के महत्व को रेखांकित करता है।

अदालत ने गौर किया कि कथित घटनाओं और 2020 में दर्ज की गई शिकायत के बीच एक लंबा अंतराल था। इसके अलावा, जब पीड़िता 2019 में अपनी माँ के साथ कुवैत में थी, तब उसने इन घटनाओं का कोई जिक्र नहीं किया, जो कि एक महत्वपूर्ण तथ्य है।

कानून का उद्देश्य न्याय सुनिश्चित करना है, न कि वैवाहिक कलह के दौरान प्रतिशोध का साधन बनना।

चिकित्सा साक्ष्यों के संबंध में भी अदालत ने कहा कि हालांकि शारीरिक निशान पाए गए थे, लेकिन वे अकेले यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे कि आरोपी ही उन कृत्यों के लिए जिम्मेदार था। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष का मामला कई विरोधाभासों से भरा हुआ था।

Did You Know?: POCSO अधिनियम का मुख्य उद्देश्य नाबालिगों को यौन अपराधों से बचाना है, लेकिन अदालती टिप्पणियां बताती हैं कि इसके दुरुपयोग के मामलों में भी वृद्धि हुई है।

Frequently Asked Questions

1. केरल हाईकोर्ट ने क्या टिप्पणी की?
कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवादों के दौरान पति को तनाव में डालने या बच्चों की कस्टडी से बचने के लिए POCSO के तहत झूठे आरोप लगाए जा सकते हैं।

2. आरोपी को राहत क्यों मिली?
अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों में गंभीर विसंगतियां थीं और अपराध की अवधि को लेकर विरोधाभास था, जिससे संदेह का लाभ आरोपी को मिला।