गुजरात सरकार ने 2019 के एक कथित आपत्तिजनक व्हाट्सएप संदेश मामले में AAP विधायक चैतर वसावा की रिहाई के खिलाफ गुजरात हाईकोर्ट में अपील दायर की है।

मुख्य बातें

  • 7 साल पुराने व्हाट्सएप संदेश मामले में गुजरात सरकार ने हाईकोर्ट का रुख किया।
  • AAP विधायक चैतर वसावा को पहले निचली अदालतों से बरी किया जा चुका है।
  • हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई सितंबर में होने की संभावना है।

गुजरात सरकार ने 2019 के एक चर्चित मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक चैतर वसावा की दोषमुक्ति को चुनौती देते हुए गुजरात हाईकोर्ट में अपील दायर की है। यह मामला एक 'यौन रूप से आपत्तिजनक' व्हाट्सएप संदेश से संबंधित है, जो सात साल पहले एक व्हाट्सएप ग्रुप में भेजा गया था।

चैतर वसावा, जो वर्तमान में AAP के राज्य कार्यकारी अध्यक्ष हैं, को 2023 में निचली अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। इसके बाद, फरवरी 2026 में राजपीपला की सत्र अदालत ने भी उनकी रिहाई को बरकरार रखा था। हालांकि, अब राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद 2019 में शुरू हुआ था जब 'बेस्ट बडीज इन लाइफ' नामक एक व्हाट्सएप ग्रुप में एक संदेश पोस्ट किया गया था। आरोप था कि यह संदेश यौन रूप से अभद्र था। उस समय वसावा भारतीय जनजातीय पार्टी (BTP) के एक आयोजक थे। अभियोजन पक्ष को यह साबित करने में कठिनाई हुई कि वह विशिष्ट संदेश वसावा के मोबाइल नंबर से ही भेजा गया था।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला डिजिटल साक्ष्यों की कानूनी वैधता और राजनीतिक संघर्ष के बीच के जटिल संबंध को दर्शाता है। चैतर वसावा न केवल एक प्रमुख आदिवासी नेता हैं, बल्कि वर्तमान में एक अन्य मामले (वन अधिकारियों को डराने का आरोप) में जेल में भी हैं। राज्य सरकार की यह कानूनी लड़ाई वसावा के राजनीतिक भविष्य को प्रभावित कर सकती है।

डिजिटल साक्ष्यों की कमी और धारा 65-B के प्रमाणन का अभाव अक्सर ऐसे मामलों में अभियोजन पक्ष के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है।

अदालत ने राज्य सरकार द्वारा अपील दायर करने में हुई देरी को स्वीकार कर लिया है, क्योंकि सरकार ने इसे 'अनिवार्य आंतरिक अनुमोदन प्रक्रिया' का परिणाम बताया था। अब सितंबर में हाईकोर्ट इस मामले की मेरिट पर सुनवाई करेगा।

क्या आप जानते हैं?: भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-B के तहत इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को अदालत में पेश करने के लिए एक विशिष्ट प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है, जिसके बिना डिजिटल सबूत अमान्य हो सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. चैतर वसावा को पहले क्यों बरी किया गया था?
अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि व्हाट्सएप संदेश वास्तव में वसावा के फोन से भेजा गया था और डिजिटल साक्ष्य तकनीकी रूप से अपर्याप्त थे।

2. वसावा वर्तमान में जेल में क्यों हैं?
वसावा को जून 2026 में वन अधिकारियों को डराने और धमकाने के एक अलग मामले में दोषी ठहराया गया है।