पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें साक्षात्कार के लिए न्यूनतम अंक निर्धारित किए गए थे। कोर्ट ने कहा कि चयन प्रक्रिया के बीच में नियम बदलना आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है।

  • हाईकोर्ट ने HPSC द्वारा साक्षात्कार के लिए तय किए गए न्यूनतम qualifying marks को रद्द कर दिया।
  • कोर्ट ने कहा कि साक्षात्कार से मात्र 6 दिन पहले चयन मानदंड बदलना अनुचित है।
  • HPSC को अब मूल विज्ञापन के अनुसार चयन प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है।

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) के एक महत्वपूर्ण निर्णय को रद्द कर दिया है। आयोग ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सहायक प्रोफेसरों की भर्ती के लिए साक्षात्कार में न्यूनतम पासिंग मार्क्स लागू करने का फैसला किया था। न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ ने इस निर्णय को अवैध माना और कहा कि एक सरकारी भर्ती एजेंसी को अपनी विश्वसनीयता बनाए रखनी चाहिए।

क्या था पूरा मामला?

मामला हरियाणा के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 189 सहायक प्रोफेसर पदों की भर्ती से जुड़ा है। DGMER, हरियाणा ने 31 मई, 2022 को एक विज्ञापन जारी किया था, जिसमें चयन का आधार स्पष्ट था: 75 अंक शैक्षणिक योग्यता (Pre-merit) के लिए और 25 अंक साक्षात्कार के लिए। हालांकि, साक्षात्कार शुरू होने से मात्र छह दिन पहले, यानी 13 दिसंबर, 2022 को HPSC ने अचानक घोषणा की कि सामान्य वर्ग के लिए साक्षात्कार में 50% और आरक्षित वर्ग के लिए 45% अंक लाना अनिवार्य होगा।

इस अचानक बदलाव को याचिकाकर्ताओं ने अदालत में चुनौती दी। उनका तर्क था कि मूल विज्ञापन या साक्षात्कार बुलावा पत्र में ऐसे किसी भी 'कट-ऑफ' का उल्लेख नहीं किया गया था।

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि साक्षात्कार के अंक केवल कुल मेरिट में योगदान देने के लिए होते हैं, न कि किसी उम्मीदवार को बिना मेरिट देखे बाहर करने के लिए।

'सीजर की पत्नी को सभी संदेहों से ऊपर रहना चाहिए'—अदालत ने कहा कि HPSC जैसी संस्था को अपनी साख पर संदेह की गुंजाइश नहीं छोड़नी चाहिए।

कानूनी और संवैधानिक पहलू

हाईकोर्ट ने इस मामले में संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 की भूमिका को रेखांकित किया। अदालत ने माना कि शैक्षणिक अंकों के लिए जो विस्तृत फॉर्मूला DGMER द्वारा बनाया गया था, उसे साक्षात्कार के नए नियमों के माध्यम से शून्य करने का प्रयास किया गया था।

अदालत ने HPSC को निर्देश दिया है कि वह मूल विज्ञापन के आधार पर पुनः मूल्यांकन करे और बिना किसी न्यूनतम साक्षात्कार कट-ऑफ के मेरिट सूची तैयार करे। सफल उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी करने और उन्हें उनके बैच के साथियों के समान लाभ देने का भी आदेश दिया गया है।

ऐतिहासिक संदर्भ

सरकारी भर्तियों में चयन मानदंडों में अचानक बदलाव अक्सर कानूनी विवादों का कारण बनता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार कहा है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान नियमों में बदलाव करना उम्मीदवारों के साथ अन्याय है और यह पारदर्शिता के सिद्धांतों के खिलाफ है।

Frequently Asked Questions

1. हाईकोर्ट ने HPSC के फैसले को क्यों रद्द किया?
क्योंकि आयोग ने साक्षात्कार से मात्र 6 दिन पहले नए न्यूनतम अंक निर्धारित कर दिए थे, जो मूल विज्ञापन का हिस्सा नहीं थे।

2. अब उम्मीदवारों के साथ क्या होगा?
HPSC को अब बिना किसी न्यूनतम साक्षात्कार कट-ऑफ के, मूल मानदंडों के आधार पर मेरिट सूची फिर से तैयार करनी होगी।