कर्नाटक सरकार ने बिदादी के पास एक फार्महाउस से 4.91 करोड़ रुपये की नकली और पुन: लेबल की गई दवाओं की जब्ती के बाद एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। यह रैकेट आईसीयू में इस्तेमाल होने वाली महंगी दवाओं के नाम पर सस्ती जेनेरिक दवाओं को बदलकर बेच रहा था।
- बिदादी के पास एक अवैध फार्महाउस से 4.91 करोड़ रुपये की नकली दवाएं जब्त की गईं।
- सरकार ने मामले की जांच के लिए 6 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।
- रैकेट में हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना से सस्ती दवाएं लाकर उन्हें महंगे ब्रांड के रूप में बेचा जा रहा था।
- आईसीयू में इस्तेमाल होने वाली जीवन रक्षक दवाओं के साथ धोखाधड़ी का गंभीर मामला सामने आया है।
बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को झकझोर देने वाले एक बड़े दवा घोटाले की जांच के लिए गुरुवार को छह सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। यह कदम बेंगलुरु दक्षिण जिले में पकड़े गए कथित नकली दवा रैकेट के बाद उठाया गया है, जहां एक अवैध रिपैकिंग इकाई से करोड़ों रुपये की नकली दवाएं बरामद की गई हैं।
हाल ही में बिदादी के पास स्थित एक फार्महाउस पर छापेमारी के दौरान, अधिकारियों ने 4.91 करोड़ रुपये मूल्य की स्प्यूरियस (नकली) और पुन: लेबल की गई दवाएं जब्त कीं। जांच में पाया गया कि यह इकाई अन्य राज्यों से कम लागत वाली जेनेरिक दवाओं को खरीदती थी और उन्हें नए वाइल्स (vials) में भरकर महंगे आयातित ब्रांडों के रूप में लेबल कर देती थी। इतना ही नहीं, 30 बक्से एक्सपायर्ड दवाएं भी बरामद हुई हैं, जिससे संदेह है कि पुरानी दवाओं को फिर से सप्लाई चेन में शामिल किया जा रहा था।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक स्थानीय अपराध नहीं है, बल्कि एक सुनियोजित राष्ट्रीय साजिश है। जब आईसीयू (ICU) जैसी संवेदनशील जगहों पर इस्तेमाल होने वाली दवाओं के साथ छेड़छाड़ की जाती है, तो यह सीधे तौर पर मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ है। यह घटना दवाओं के वितरण और नियामक निगरानी (regulatory oversight) में बड़ी खामियों को उजागर करती है।
स्वास्थ्य मंत्री यू टी खदेर के अनुसार, यह एक राष्ट्रव्यापी रैकेट है जो हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों से दवाओं का अवैध स्रोत प्राप्त कर रहा है।
SIT का नेतृत्व संयुक्त पुलिस आयुक्त (पश्चिम) सी वमशिकृष्णा करेंगे। इस टीम में पुलिस अधीक्षक शिवा प्रकाश देवराजू, सीआईडी एसपी लोकेश बी जगलसर, सहायक औषधि नियंत्रक मंजुनाथ रेड्डी और नम्रता हल्लर, तथा ड्रग इंस्पेक्टर नेहा मुरकी शामिल हैं। यह टीम न केवल इस फार्महाउस, बल्कि राज्य भर में पंजीकृत अन्य संबंधित आपराधिक मामलों की भी जांच करेगी।
जांच का दायरा अब अस्पतालों और आईसीयू तक विस्तृत हो गया है। सरकार यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि किन अस्पतालों ने अनजाने में इन नकली दवाओं का उपयोग किया है। मुख्य आरोपी प्रशांत, जो एक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव बताया जा रहा है, फिलहाल फरार है, जबकि एक व्यक्ति को हिरासत में लिया जा चुका है।
Frequently Asked Questions
1. SIT का मुख्य उद्देश्य क्या है?
SIT का उद्देश्य इस दवा रैकेट के पूरे नेटवर्क, वितरण श्रृंखला और उन अस्पतालों की पहचान करना है जहाँ ये नकली दवाएं पहुंचाई गईं।
2. यह घोटाला कैसे काम कर रहा था?
अपराधी अन्य राज्यों से सस्ती जेनेरिक दवाएं लाते थे, उन्हें नए कंटेनरों में भरते थे और महंगे ब्रांड के लेबल लगाकर अस्पतालों को बेच देते थे।