बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के सह-अध्यक्ष वाई.आर. सदाशिव रेड्डी ने अध्यक्ष मानन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने संस्था के भीतर नियुक्तियों, वित्तीय अनियमितताओं और लंबे कार्यकाल को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
- BCI सह-अध्यक्ष ने अध्यक्ष मानन कुमार मिश्रा से इस्तीफे की मांग की।
- संस्था के भीतर परिवारवाद और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
- NALSAR विवाद के बाद से BCI के नेतृत्व पर दबाव बढ़ गया है।
- सुप्रीम कोर्ट में मानन मिश्रा के लंबे कार्यकाल को चुनौती देने वाली याचिका दायर की गई है।
नई दिल्ली: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के भीतर चल रहा सत्ता संघर्ष अब एक बड़े विवाद में बदल गया है। शनिवार को, BCI के सह-अध्यक्ष वाई.आर. सदाशिव रेड्डी ने एक आधिकारिक पत्र के माध्यम से अध्यक्ष मानन कुमार मिश्रा से उनके पद से इस्तीफे की मांग की है। रेड्डी ने न केवल मिश्रा के लंबे कार्यकाल पर सवाल उठाए, बल्कि संस्था के कामकाज और वित्तीय प्रशासन में व्यापक भ्रष्टाचार की आशंका भी जताई है।
यह विवाद तब गहराया जब मिश्रा के नेतृत्व में BCI ने NALSAR के 2026 बैच के स्नातकों के नामांकन को रोकने का निर्देश दिया था। हालांकि, कानूनी समुदाय के भारी विरोध के बाद इस निर्देश को वापस लेना पड़ा और मिश्रा को माफी मांगनी पड़ी। लेकिन, बॉम्बे बार एसोसिएशन सहित कई कानूनी निकायों ने इस माफी को अपर्याप्त बताया है और मिश्रा के इस्तीफे की मांग की है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह विवाद केवल व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि यह भारत के कानूनी नियामक ढांचे की अखंडता को प्रभावित करता है। यदि BCI जैसे शीर्ष निकाय में पारदर्शिता की कमी होती है, तो यह पूरे कानूनी पेशे और न्याय प्रणाली के प्रति जनता के विश्वास को कम कर सकता है।
रेड्डी ने अपने पत्र में बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि BCI के स्टाफ का एक बड़ा हिस्सा मानन मिश्रा से व्यक्तिगत रूप से जुड़ा हुआ है, जिसमें उनके परिवार के सदस्य भी शामिल हैं। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि नए लॉ कॉलेजों को मान्यता देने के बदले में ₹25 लाख से ₹1 करोड़ तक की अवैध 'योगदान' राशि की मांग की जा रही है।
"एक निर्वाचित कार्यालय, जिसका एक ही व्यक्ति 14 वर्षों से कब्जा बनाए हुए है, वास्तविक अर्थों में निर्वाचित कार्यालय नहीं रह जाता है।" - वाई.आर. सदाशिव रेड्डी
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: मानन कुमार मिश्रा 2012 से लगातार BCI के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें 2025 में एक और कार्यकाल के लिए चुना गया था, जो कि संस्था के इतिहास में एक अभूतपूर्व घटना है। इसी लंबे कार्यकाल को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर की गई है, जो उनके पद पर बने रहने की वैधता पर सवाल उठाती है।
वर्तमान में, BCI के कार्यालय के बाहर युवा अधिवक्ताओं का विरोध प्रदर्शन जारी है। 'ऑल इंडिया यंग एडवोकेट्स एसोसिएशन' ने BCI की चुनाव प्रणाली में सुधार और अधिक जवाबदेही की मांग की है। संस्था ने अपनी आगामी प्रेस कॉन्फ्रेंस को 22 अगस्त से स्थगित कर अब 24 अगस्त के लिए निर्धारित किया है।
Frequently Asked Questions
1. मानन मिश्रा के खिलाफ मुख्य आरोप क्या हैं?
मुख्य आरोपों में परिवारवाद, वित्तीय अनियमितताएं, लॉ कॉलेजों से अवैध वसूली और अत्यधिक लंबे कार्यकाल का दुरुपयोग शामिल है।
2. NALSAR विवाद क्या था?
BCI ने NALSAR के छात्रों के नामांकन पर रोक लगाने का निर्देश दिया था, जिसे बाद में कानूनी विरोध के कारण वापस ले लिया गया था।