सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक सेवा परीक्षा के लिए आवश्यक वकालत के अनुभव को तीन साल से घटाकर एक साल कर दिया है। नए नियमों के तहत चयनित उम्मीदवारों को अब दो साल का गहन प्रशिक्षण लेना होगा।

  • सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के लिए वकालत का अनुभव 3 साल से घटाकर 1 साल किया गया।
  • मार्च 2027 तक के लिए फ्रेश लॉ ग्रेजुएट्स को विशेष छूट दी गई है।
  • चयनित उम्मीदवारों को 2 साल का अनिवार्य प्रशिक्षण और क्लर्कशिप करनी होगी।

नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायिक सेवा में प्रवेश के नियमों में एक ऐतिहासिक बदलाव करते हुए कानूनी पेशेवरों के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं। एक महत्वपूर्ण फैसले में, कोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की भर्ती के लिए आवश्यक वकालत के अनुभव को तीन साल से घटाकर केवल एक वर्ष कर दिया है।

यह निर्णय मुख्य न्यायाधीश सूर्याकांत, न्यायमूर्ति अगस्टीन जॉर्ज मासीह की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा दिया गया। हालांकि, न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन ने इस निर्णय पर असहमति जताई। इस फैसले का उद्देश्य न्यायिक सेवाओं में युवाओं की भागीदारी को बढ़ाना है, जबकि अनुभव की कमी को प्रशिक्षण के माध्यम से पूरा किया जाएगा।

नया प्रशिक्षण ढांचा: चयन के बाद की तैयारी

सुप्रीम कोर्ट ने अनुभव की अनिवार्यता को कम तो किया है, लेकिन व्यावहारिक ज्ञान के महत्व को कम नहीं किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा पास करने का मतलब तुरंत जज बनना नहीं होगा। चयनित उम्मीदवारों को पहले 'ट्रेनी न्यायिक अधिकारी' के रूप में कार्य करना होगा।

नए नियमों के तहत, उम्मीदवारों को दो चरणों में प्रशिक्षण लेना होगा: पहले एक वर्ष राज्य न्यायिक अकादमी में गहन प्रशिक्षण, और उसके बाद एक वर्ष की संरचित क्लर्कशिप। इस क्लर्कशिप के दौरान, छह महीने जिला न्यायालय के न्यायाधीश के तहत और शेष छह महीने उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के मार्गदर्शन में बिताने होंगे।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह बदलाव न्यायिक प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। पहले जहाँ वकालत का लंबा अनुभव एक बाधा बन रहा था, वहीं अब सरकार और न्यायपालिका प्रशिक्षण के माध्यम से गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इससे योग्य युवा कानून स्नातक बिना किसी देरी के न्यायिक करियर की शुरुआत कर सकेंगे।

यह निर्णय कानूनी शिक्षा और वास्तविक न्यायिक कार्य के बीच के अंतर को पाटने का एक साहसिक प्रयास है।

संक्रमणकालीन राहत (Transitional Relief): कोर्ट ने उन उम्मीदवारों के लिए विशेष प्रावधान किए हैं जो पुराने और नए नियमों के बीच फंस सकते हैं। 20 मई 2025 से 31 मार्च 2027 के बीच जारी होने वाली भर्तियों के लिए, लॉ ग्रेजुएट्स बिना किसी पूर्व अनुभव के आवेदन कर सकते हैं। उन्हें स्वतः ही एक वर्ष का अनुभव प्राप्त माना जाएगा। हालांकि, 1 अप्रैल 2027 से लागू होने वाले नियमों के लिए एक वर्ष की वास्तविक वकालत अनिवार्य होगी।

Did You Know?: न्यायिक प्रशिक्षण के दौरान क्लर्कशिप का उद्देश्य न्यायाधीशों के निर्णय लेने की प्रक्रिया और अदालती शिष्टाचार को गहराई से समझना है।

Frequently Asked Questions

1. क्या अब बिना वकालत के छात्र जज बन सकते हैं?
मार्च 2027 तक जारी होने वाली भर्तियों के लिए फ्रेश ग्रेजुएट्स आवेदन कर सकते हैं, लेकिन उन्हें चयन के बाद 2 साल का प्रशिक्षण लेना होगा।

2. नया प्रशिक्षण मॉडल क्या है?
इसमें एक साल की अकादमी ट्रेनिंग और एक साल की क्लर्कशिप (जिला और उच्च न्यायालय में) शामिल है।