चेन्नई की सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने एक बड़े हाउसिंग लीज घोटाले का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने एक फर्जी प्रॉपर्टी मैनेजमेंट कंपनी के जरिए 34 मकान मालिकों और किरायेदारों से लगभग 2.11 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की।

  • चेन्नई पुलिस ने दो आरोपियों, हेलेनरोज और प्रेमकुमार को गिरफ्तार किया।
  • आरोपियों ने 'इमयम होम्स प्रॉपर्टी मैनेजमेंट' नामक एक फर्जी कंपनी बनाई थी।
  • कुल 34 मकान मालिकों और किरायेदारों के साथ ₹2.11 करोड़ की धोखाधड़ी की गई।
  • धोखाधड़ी का तरीका: मकान किराए पर लेना और फिर उसे ऑनलाइन लीज पर देना।

चेन्नई की सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) ने एक बड़े वित्तीय अपराध का खुलासा करते हुए एक महिला और उसके सहयोगी को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने एक फर्जी कंपनी का जाली नेटवर्क बनाकर 34 मकान मालिकों और किरायेदारों को करीब ₹2.11 करोड़ का चूना लगाया। यह घोटाला तब सामने आया जब एक पीड़िता ने ऑनलाइन विज्ञापनों के माध्यम से घर किराए पर लेने की कोशिश की और बाद में खुद को ठगा हुआ पाया।

जांच में पता चला है कि आरोपी हेलेनरोज (59) और प्रेमकुमार (50) ने 'इमयम होम्स प्रॉपर्टी मैनेजमेंट' (Imayam Homes Property Management) नाम से एक फर्जी संस्था बनाई थी। वे चेन्नई और उसके उपनगरों में मकानों को किराए पर लेने के विज्ञापन देते थे। पुलिस के अनुसार, वे पहले मकान मालिकों से कंपनी के नाम पर घर किराए पर लेते थे और फिर उन घरों को ग्राहकों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से लीज पर दे देते थे।

धोखाधड़ी का तरीका (Modus Operandi)

इस घोटाले का शिकार हुई फातिमा बीवी ने बताया कि उन्होंने OLX पर एक विज्ञापन देखा था। जब उन्होंने संपर्क किया, तो उन्हें वलसरवाक्कम स्थित एक कार्यालय में बुलाया गया। वहां आरोपियों ने एक मकान (जो वास्तव में मणिकंदन नामक व्यक्ति का था) को कंपनी के नाम पर किराए पर लिया था और फातिमा को ₹7 लाख की लीज पर दे दिया। हालांकि, आरोपियों ने मकान मालिक को मासिक किराया देना बंद कर दिया, जिसके बाद मणिकंदन ने फातिमा से घर खाली करने को कहा। तब फातिमा को एहसास हुआ कि वह एक बड़े जाल में फंस चुकी हैं।

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह के डिजिटल युग के घोटाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता का फायदा उठाते हैं। आरोपी न केवल किरायेदारों से लीज राशि वसूलते थे, बल्कि मकान मालिकों को भी किराया नहीं देते थे। उन्होंने ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, बैंक ट्रांसफर और नकद के माध्यम से बड़ी मात्रा में धन इकट्ठा किया और फिर कंपनी बंद करके फरार हो गए।

डिजिटल रेंटल मार्केट में बिना भौतिक सत्यापन के लीज एग्रीमेंट करना भारी वित्तीय जोखिम पैदा कर सकता है।

ऐतिहासिक संदर्भ: रेंटल फ्रॉड का बढ़ता चलन

भारत के बड़े शहरों, विशेषकर चेन्नई, बेंगलुरु और मुंबई जैसे महानगरों में प्रॉपर्टी मैनेजमेंट के नाम पर होने वाले घोटाले पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़े हैं। जैसे-जैसे लोग ऑनलाइन रेंटल प्लेटफॉर्म पर निर्भर हो रहे हैं, जालसाज फर्जी 'प्रॉपर्टी मैनेजमेंट' कंपनियां बनाकर लोगों के विश्वास का फायदा उठा रहे हैं।

Frequently Asked Questions

1. यह घोटाला कैसे अंजाम दिया गया?
आरोपियों ने फर्जी कंपनी के नाम पर मकान किराए पर लिए और फिर उन्हीं मकानों को ग्राहकों को लीज पर देकर मोटी रकम वसूल ली।

2. गिरफ्तार किए गए आरोपी कौन हैं?
चेन्नई पुलिस ने हेलेनरोज और प्रेमकुमार को गिरफ्तार किया है, जो इस फर्जी कंपनी के संचालक थे।

Did You Know?: ऑनलाइन रेंटल धोखाधड़ी में अपराधी अक्सर फर्जी ऑफिस और आधिकारिक दिखने वाले दस्तावेजों का उपयोग करते हैं ताकि वे वैध लग सकें।