दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने ₹2 करोड़ की रंगदारी मांगने वाले बिश्नोई-मलिक गिरोह के कथित सदस्य अमरजीत को रानी बाग से गिरफ्तार किया है। आरोपी ने क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पैसे की मांग की थी और जान से मारने की धमकी दी थी।

  • दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 40 वर्षीय अमरजीत उर्फ अमर को गिरफ्तार किया।
  • आरोपी पर ₹2 करोड़ की रंगदारी मांगने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप है।
  • गिरोह ने क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से अवैध धन की मांग की थी।
  • आरोपी Lawrence Bishnoi और Randeep Malik गिरोह से जुड़े होने का संदेह है।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए Lawrence Bishnoi-Randeep Malik गिरोह से जुड़े एक कथित सदस्य को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान 40 वर्षीय अमरजीत उर्फ अमर के रूप में हुई है, जिसे तकनीकी निगरानी और जमीनी सूचनाओं के आधार पर रानी बाग इलाके से पकड़ा गया।

यह मामला अप्रैल महीने में दर्ज किया गया था, जब एक पीड़ित ने मौर्य एन्क्लेव थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उसे एक व्यक्ति के फोन और संदेश प्राप्त हुए थे, जिसने खुद को बिश्नोई गिरोह का सदस्य रणदीप मलिक बताया था। आरोपी ने पीड़ित और उसके परिवार की हत्या करने की धमकी देते हुए ₹2 करोड़ की भारी-भरकम रंगदारी मांगी थी।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि संगठित अपराध गिरोह अब पारंपरिक वसूली के बजाय क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग कर रहे हैं, जिससे उन्हें ट्रैक करना और उनके वित्तीय नेटवर्क को तोड़ना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। यह गिरफ्तारी डिजिटल अपराध और संगठित जबरन वसूली के बीच बढ़ते गठजोड़ को दर्शाती है।

विशेष पुलिस आयुक्त (क्राइम ब्रांच) HGS Dhaliwal ने बताया कि अमरजीत लंबे समय से फरार चल रहा था। उसके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 84 के तहत कार्यवाही भी की गई थी, और दिल्ली उच्च न्यायालय ने उसकी अंतरिम जमानत याचिका को भी खारिज कर दिया था।

संगठित गिरोहों द्वारा क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक नया और जटिल मोर्चा खोल रहा है।

पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ है कि अमरजीत का काम संभावित लक्ष्यों की पहचान करना और उन्हें डराना था। आरोपी त्रिनगर का निवासी है और पहले अवैध शराब के कारोबार में भी शामिल रहा है। पुलिस ने बताया कि रंगदारी के लिए एक पेमेंट लिंक भी साझा किया गया था, जो डिजिटल लेनदेन के माध्यम से पैसे प्राप्त करने की योजना का हिस्सा था।

Historical Background

लॉरेंस बिश्नोई गिरोह पिछले कुछ वर्षों में भारत के सबसे खतरनाक संगठित अपराध सिंडिकेट्स में से एक बनकर उभरा है। यह गिरोह मुख्य रूप से जबरन वसूली, हत्या और डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके वित्तीय अपराधों में शामिल है। हाल के वर्षों में, पुलिस ने इस गिरोह के नेटवर्क को तोड़ने के लिए तकनीकी निगरानी को अत्यधिक मजबूत किया है।

Frequently Asked Questions

1. आरोपी ने रंगदारी कैसे मांगी थी?
आरोपी ने फोन कॉल और संदेशों के माध्यम से ₹2 करोड़ की मांग की थी और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए भुगतान करने को कहा था।

2. आरोपी कहाँ से पकड़ा गया?
अमरजीत को दिल्ली के रानी बाग इलाके के मुल्तानी मोहल्ला से गिरफ्तार किया गया।

Did You Know?: अपराधी अब डिजिटल फुटप्रिंट छुपाने के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग और क्रिप्टोकरेंसी का सहारा ले रहे हैं।