केरल राज्य सूचना आयोग ने एक 82 वर्षीय बुजुर्ग को गलत जानकारी देने के लिए सर्वे निदेशक को ₹1 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत संपत्ति के रिकॉर्ड मांगने पर अधिकारी ने भ्रामक जवाब दिया था।
- केरल राज्य सूचना आयोग ने सर्वे निदेशक को ₹1 लाख का मुआवजा देने का निर्देश दिया।
- पूर्व लोक सूचना अधिकारी (PIO) पर ₹20,000 का जुर्माना लगाया गया।
- 82 वर्षीय याचिकाकर्ता को संपत्ति के रिकॉर्ड के लिए वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा।
- अधिकारी द्वारा गलत और भ्रामक जानकारी देना कानून का गंभीर उल्लंघन माना गया।
केरल के एक ऐतिहासिक फैसले में, राज्य सूचना आयोग ने सर्वे और भूमि रिकॉर्ड विभाग के निदेशक, डॉ. जे.ओ. अरुण को एक 82 वर्षीय नागरिक को ₹1 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह मामला सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत प्राप्त जानकारी में हेरफेर और पारदर्शिता की कमी से जुड़ा है।
मामले की जड़ें वर्ष 2013 में जाती हैं, जब याचिकाकर्ता कुरियन जॉर्ज ने अपने संपत्ति के क्षेत्र और रिकॉर्ड के संबंध में फाइलों के निरीक्षण के लिए एक RTI आवेदन दायर किया था। हालांकि, तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी (PIO), पी. विश्वंभरन ने आवेदन का गलत और भ्रामक जवाब दिया और आवेदक को फाइलों के निरीक्षण का अधिकार देने से इनकार कर दिया।
कानूनी संघर्ष और आयोग का रुख
जब पहली अपील के माध्यम से भी जानकारी नहीं मिली, तो मामला केरल उच्च न्यायालय तक पहुँच गया। अंततः, उच्च न्यायालय ने मामले को विचार के लिए सूचना आयोग को भेज दिया। मुख्य सूचना आयुक्त वी. हरि नायर ने सुनवाई के दौरान पाया कि पीआईओ द्वारा दिया गया जवाब न केवल गलत था, बल्कि यह कानून का एक गंभीर उल्लंघन था।
आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल माफी मांग लेना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि याचिकाकर्ता को इस प्रक्रिया के दौरान अत्यधिक शारीरिक, मानसिक और वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी अधिकारियों की लापरवाही नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन करती है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह फैसला भारत में RTI के कार्यान्वयन के लिए एक मिसाल कायम करता है। यह दर्शाता है कि सरकारी अधिकारी सूचना छिपाने या गलत जानकारी देने के लिए व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराए जा सकते हैं। यह निर्णय नौकरशाही में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सूचना का अधिकार केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र में नागरिक की शक्ति का सबसे बड़ा हथियार है।
इस मामले में, तत्कालीन पीआईओ पी. विश्वंभरन, जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, उन पर ₹20,000 का व्यक्तिगत जुर्माना भी लगाया गया है। सर्वे निदेशक ने आयोग के समक्ष स्वीकार किया कि विभाग में खामियां थीं और भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने का वादा किया।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: आयोग ने मुआवजा देने का आदेश क्यों दिया?
उत्तर: क्योंकि अधिकारी ने गलत जानकारी दी, जिससे 82 वर्षीय बुजुर्ग को वर्षों तक मानसिक और वित्तीय परेशानी झेलनी पड़ी।
प्रश्न 2: क्या अधिकारी पर जुर्माना भी लगाया गया है?
उत्तर: हाँ, पूर्व लोक सूचना अधिकारी पर ₹20,000 का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया गया है।